बदायूं। मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मिलावट दूध में की जा रही है। खास बात यह है कि 2020-21 में मिलावट के मामलों में खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मिलावटखोरों से 1.64 करोड़ का जुर्माना वसूल किया। इस वर्ष 22 मामलों में अब तक 26.10 लाख जुर्माना वसूला जा चुका है। सबसे ज्यादा मिलावट दूध में समाने आई है। जांच में आधे से ज्यादा नमूने फेल हो गए।
खाद्य पदार्थों में बड़े स्तर पर मिलावट हो रही है। सिंथेटिक दूध, सिंथेटिक पनीर से लेकर मिठाइयों, बेसन, दालों और आटा तक में मिलावट हो रही है। एफएसडीए ने जिले में अभियान चलाकर 2020-21 में खाद्य पदार्थों के कुल 334 सैंपल लिए थे। इनमें 169 सैंपल जांच में फेल हो गए। दूध के कुल 134 सैंपल में इस वर्ष 64 सैंपल फेल हुए। दूध के सैंपल की बात करें तो आधे से ज्यादा सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध में रिफाइंड, वॉशिंग पाउडर और यूरिया तक की मिलावट पाई गई। सैंपल फेल होने के इन मामलों में एफएसडीए ने मिलावटखोरों से 1.64 करोड़ का जुर्माना वसूल किया।
इस वर्ष की बात करें तो छह माह के दौरान अब तक जिले में कुल 113 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें दूध के 39 सैंपल शामिल हैं। गौर करने वाली बात यह है कि प्रयोगशाला से अब तक आईं रिपोर्ट में दूध के 10 सैंपल फेल निकले हैं। इस वर्ष मिलावट के 22 मामलों में 26.10 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूल किया जा चुका है। मिलावट के सबसे ज्यादा मामले डेयरी उत्पादों में सामने आ रहे हैं। इनमें भी दूध के सबसे ज्यादा सैंपल फेल हो रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि सिंथेटिक दूध किडनी और लीवर पर खतरनाक प्रभाव डालता है। आमतौर पर बच्चों के लिए यह सबसे ज्यादा नुकसानदेह होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि सिंथेटिक दूध के सेवन से बच्चों को पेट संबंधी रोग हो जाते हैं। उनकी आंखों पर भी इसका प्रतिकूल असर होता है। इसके साथ ही सिंथेटिक दूध के सेवन से बच्चे कुपोषण तक का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में दूध का सेवन काफी सावधानी के साथ करना चाहिए।
मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जाता है। दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट के ज्यादा मामले सामने आते हैं। पिछले वर्ष दूध के कुल 134 नमूनों में 65 नमूने फेल हुए थे। इस वर्ष अब तक दूध के 39 नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें 10 की रिपोर्ट आ चुकी है। यह नमूने जांच में फेल हुए हैं। पिछले वर्ष एक करोड़ 64 लाख और इस वर्ष अब तक मिलावट के मामलों में 26 लाख 10 हजार का जुर्माना वसूला किया जा चुका है। - चंद्रशेखर मिश्रा, जिला अभिहीत अधिकारी