सहसवान। वन रेंज के गांव भवानीपुर खैरू और भवानीपुर खल्ली के जंगलों में रविवार को तेंदुआ देखे जाने से ग्रामीण दहशत में आ गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीमों ने जंगल में कांबिंग की लेकिन तेंदुआ का कोई पता नहीं लगा। कुछ स्थानों पर पदचिह्न जरूर मिले हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो सका है कि यह पदचिह्न तेंदुआ के ही हैं या उसी की तरह दिखने वाले किसी अन्य वन्य जीव के हैं।
सहसवान वन रेंज के गांव भवानीपुर खल्ली और भवानीपुर खैरू के ग्रामीण खेतों में काम कर रहे थे। बताते हैं कि इसी दौरान यहां तेंदुआ पहुंच गया। ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। वे भागकर गांव आए और पूर्व प्रधान अकरम को इस बारे में बताया। इसके बाद पूर्व प्रधान समेत ग्रामीणों ने इस संबंध में सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना पर रेंजर संजय रस्तोगी ने टीमें बनाकर इलाके में कांबिंग कराई लेकिन तेंदुआ का कुछ पता नहीं लगा। हालांकि, जंगल में कुछ स्थानों पर पदचिह्न जरूर मिले हैं। अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह पदचिह्न तेंदुआ के ही हैं। जांच की जा रही है। सोमवार को भी जंगल में कांबिंग कराई जाएगी।
पदचिह्न को लेकर हो चुकी है विभाग की किरकिरी
बदायूं। ककराला के वार्ड नंबर 22 के रहने वाले एक ग्रामीण पर 23 अप्रैल को कटिया फरीदपुर ककराला टाउन के जंगल में तेंदुआ ने हमला कर दिया था। इसमें ग्रामीण घायल हो गया। वन संरक्षक जावेद अख्तर ने टीम के साथ मुआयना किया था। उन्होंने जंगल में मिले पदचिह्न तेंदुआ के होने की बात कही थी। इसके बाद कई दिन तक टीमों ने कांबिंग की लेकिन तेंदुआ का पता नहीं लगा। बाद में वन विभाग की ओर से दावा किया गया था कि पदचिह्न तेंदुआ के नहीं बल्कि लकड़बग्गा के हैं। उस समय विभाग की काफी किरकिरी हुई थी।