बदायूं। पांच साल पहले शहर के एक चर्चित मामले में स्पेशल जज पाक्सो एक्ट रमाशंकर सिंह ने नाबालिग को अगवा करने में नामजद एक युवक को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुजरिम पर 63 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एक अन्य आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। कोर्ट ने अर्थदंड की रकम जमा होने पर संपूर्ण धनराशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है।
शहर के थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में नाबालिग किशोरी की ओर से 26 जून 2015 को दी गई। तहरीर के अनुसार 23 जून 2015 की सुबह जब वह दुकान से सामान लेने जा रही थी। तभी पीछे से एक युवक आया और कहा कि तुम्हारा भाई बुला रहा है। किशोरी जब वहां पहुंची तो शिवम् संतोषी पुत्र महेंद्र पाल सिंह निवासी आवास विकास थाना सिविल लाइन और उसका दोस्त किशोरी को जबरन अपनी बाइक पर बैठाकर नगला शर्की गांव के खेतों में ले गए। मारपीट की और दुराचार किया। किशोरी के शोर मचाने पर लोगों ने ललकारा तो शिवम् संतोषी अपने दोस्त अंकित मिश्र पुत्र अनिल कुमार मिश्र निवासी आदर्श नगर थाना सिविल लाइन के साथ भाग गया। थाना पुलिस ने शिवम् संतोषी और अंकित मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट रमाशंकर सिंह ने साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मदनलाल राजपूत और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुनने के बाद कोर्ट ने नाबालिग को अगवा व मारपीट करने के मामले में शिवम् संतोषी पुत्र महेंद्र पाल को मुजरिम ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। मुजरिम शिवम् संतोषी पर कोर्ट ने 63 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, दूसरे आरोपी अंकित मिश्र पुत्र अनिल कुमार मिश्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।