बदायूं। सिविल लाइंस इलाके की जिस आंगनबाड़ी वर्कर ने शेखूपुर चौकी पुलिस समेत सात लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है, पुलिस ने उसे सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि महिला और उसका पति खुद दोषी है। महिला पर घोटाले का आरोप है। जिन लोगों ने उसकी पोल खोली थी अब वह उन्हीं को फंसाने का षड्यंत्र रच रही है। पुलिस ने उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
रविवार को सिविल लाइंस क्षेत्र की एक आंगनबाड़ी वर्कर ने अपने गांव के कुछ लोगों समेत शेखूपुर चौकी पुलिस पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। जब ये मामला चर्चा में आया तो पुलिस के होश उड़ गए। फिर पुलिस ने मामले की खोजबीन शुरू कर दी। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर सुधाकर पांडेय के मुताबिक जब ये आंगनबाड़ी वर्कर अपने गांव की कुछ महिलाओं को पोषाहार वितरित कर रही थी, तभी अन्य महिलाओं ने आकर हंगामा किया था। इनमें मारपीट भी हुई। उसके पति ने एक महिला के साथ अभद्रता की। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उसे जेल भेजा गया।
इधर, गांव की एक महिला ने आंगनबाड़ी वर्कर पर पोषाहार घोटाले का आरोप लगाया था। इस पर जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई। इसमें कई महिलाएं ऐसी पाई गईं, जिन्हें पोषाहार मिला ही नहीं था। इसकी जांच बीडीपीओ उझानी तरुण वर्मा ने की थी। उसके बाद अधिकारियों को सौंप दी थी। इसको लेकर आंगनबाड़ी वर्कर कुछ लोगों को फंसाने की कोशिश कर रही थी। इस मामले में महिला और उसके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। इसकी तहरीर थाने में पहुंच गई है।
आंगनबाड़ी वर्कर द्वारा लगाया गया आरोप झूठा निकला है। वह खुद एक घोटाले में दोषी है। उसका पति छेड़छाड़ के मामले में जेल गया है। अब वह दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराने की तैयारी में है। उसके खिलाफ तहरीर आ गई है। उस पर कार्रवाई चल रही है। - सुधाकर पांडेय, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस