उझानी। शिमला मिर्च ने इस बार किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। बंपर पैदावार के साथ ही इस बार फसल रोगमुक्त रही। यही कारण है कि यहां की शिमला मिर्च की मांग इस बार दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड समेत पंजाब में भी है। वहां से व्यापारी आकर शिमला मिर्च ले जा रहे हैं।
उझानी क्षेत्र में शिमला मिर्च की खेती का रकबा पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। उत्पादकों की संख्या में इजाफे के साथ ही गुणवत्ता में सुधार भी हुआ। पहले बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, आगरा, मथुरा आदि जिलों में यहां की शिमला मिर्च की मांग बढ़ी। अब यह शिमला मिर्च यूपी के बाहर भी पहुंचने लगी है।
दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में जायकेदारों को यहां कि शिमला मिर्च पसंद आई है। इन राज्यों की प्रमुख मंडियों में भी उझानी की शिमला मिर्च की मांग तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि वहां से थोक के व्यापारियों ने यहां की मंडी का रुख किया है।
कमीशन एजेंट सुदेश पाल कहते हैं कि शिमला मिर्च का थोक भाव करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। एक बोरे में करीब 40 किलोग्राम शिमला मिर्च होती है, जो आठ सौ रुपये तक बिक रही है। यानी दो हजार रुपये प्रति क्विंटल का रेट है। शिमला मिर्च सस्ती मिलने पर थोक व्यापारी किसानों के खेतों तक पहुंचकर सीधे सौदा कर लेते हैं।
किसान का रकबा एक-डेढ़ बीघा है तो वह सीधे उसे लादकर मंडी तक पहुंच जाते हैं। बीते साल बारिश और बीमारियों की वजह से एक हजार क्विंटल से अधिक दाम नहीं मिल पाए थे। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार अनुकूल मौसम और रोगमुक्त शिमला मिर्च ने उत्पादकों की आमदनी दोगुनी कर दी है।
लागत के मुकाबले प्रति बीघा करीब 40 हजार रुपये का फायदा
शिमला मिर्च की फसल को लेकर जानकारों की मानें तो पौध लगाने से लेकर रोपित किए जाने और फसल तैयार होने तक प्रति बीघा लागत करीब 30 हजार रुपये तक आ जाती है। पौधरोपण के 45 दिन बाद से शिमला मिर्च तोड़ी जाने लगती है। एक बार में एक बीघा में करीब चार क्विंटल शिमला मिर्च का उत्पादन हो जाता है। अगर समय पर सिंचाई और कीटनाशक का इस्तेमाल कर लिया जाए तो एक बीघा में 40 क्विंटल तक पैदावार हो जाती है।
हाईवे से जुड़े बाइपास पर लगता है शिमला मिर्च का बाजार
बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़े बाइपास स्थित मिहौना मोड़ के पास रोजाना शाम पांच बजे से देर रात तक शिमला मिर्च के थोक बाजार में व्यापारियों के अलावा इलाके के किसान भी नजर आते हैं। कमीशन एजेंटों के जरिये थोक के व्यापारी अच्छी गुणवत्ता की शिमला मिर्च खरीदकर पिकअप और मेटाडोर आदि से लोड कराके पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड आदि की प्रमुख मंडियों को भेज देते हैं। कुछ किसान तो बरेली, आगरा, मथुरा आदि की मंडियों में खेतों से ही पिकअप लोड कर निकल पड़ते हैं।
इस बार मिली है अच्छी फसल
पिछले साल शिमला मिर्च में बीमारी लग जाने के कारण भाव काफी कम मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार बंपर पैदावार के साथ फसल की गुणवत्ता भी अच्छी है। शिमला मिर्च दिल्ली तक जा रही है। - ओमकार सिंह, किसान
शिमला मिर्च की खरीदारी को दिल्ली समेत कई राज्यों से व्यापारी आ रहे हैं। भाव भी उम्मीद के अनुरूप मिल रहा है। शिमला मिर्च की फसल में इस बार कीटनाशक का इस्तेमाल किया, जिससे फसल में कीड़ा नहीं लगा। - अमर सिंह, किसान
उझानी में शिमला मिर्च की फसल। संवाद
उझानी में शिमला मिर्च की फसल। संवाद