बदायूं। नीलामी की सूची में शामिल खटारा बसों को बदायूं डिपो प्रबंधन सड़कों पर दौड़ा रहा है। कई बार यह खटारा बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं, जिस कारण यात्रियों को दिक्कत होती है। डिपो के बेड़े में शामिल 50 बसें तो ऐसी हैं जिनके सड़कों पर दौड़ते हुए 10 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं। इन बसों के दिल्ली में प्रवेश पर एक साल पहले ही रोक लग चुकी है।
बदायूं डिपो के बेड़े में 131 बसें निगम की हैं। इसके अलावा 37 अनुबंधित बसें हैं। निगम की बसों की बात करें तो अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि 70 फीसदी बसों में फॉग लाइट नहीं हैं। हाल ही में मुख्यालय की ओर से डिपो को ऑलवेदर बल्ब उपलब्ध कराए गए हैं। यह बल्ब भी सभी बसों में नहीं लगाए जा सके हैं। इसके साथ ही 30 से ज्यादा बसों की खिड़कियों में शीशे नहीं हैं। सर्द मौसम मे इन बसों में सफर करना यात्रियों के लिए काफी दुष्कर हो रहा है।
बदायूं-दातागंज, बदायूं-फर्रुखाबाद के बीच रोडवेज की बसें लगातार ब्रेकडाउन हो रहीं हैं। बीते सप्ताह की बात करें तो बदायूं डिपो की तीन बसें रास्ते में खराब हुईं। इन बसों की सवारियों को दूसरी बसों के जरिए गंतव्य तक पहुंचाया गया। सर्द रातों में कोहरा होने के कारण बसों की रफ्तार भी थम रही है। बसों में फॉग लाइन और ऑलवेदर बल्ब न होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, रोडवेज यात्रियों से सेवाकर भी वसूल करता है इसके बाद भी रोडवेज स्टैंड से लेकर सफर तक यात्री सेवाओं का बुरा हाल है।
एआरएम लक्ष्मण सिंह के स्तर से वर्कशॉप के जिम्मेदारों के खिलाफ वेतन कटौती और वेतन रोकने की कार्रवाई भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही।
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बसों के किराये में भी भिन्नता, हो रहे झगड़े
बदायूं से बरेली और इसी रूट पर आगरा, मथुरा, हाथरस की ओर से आने वाली बसों में बदायूं से बरेली के बीच किराये में भी भिन्नता है। ई-टीएम से यात्रियों को जो टिकट दिया जाता है वह बदायूं से बरेली के बीच 62 रुपये का है जबकि मेन्युअल टिकट 63 या फिर 62 रुपये का दिया जा रहा है। कई बार यात्री इसको लेकर परिचालक से झगड़ा भी करते हैं। मेन्युअल और ई-टीएम के टिकट में किराया अलग-अलग होने का कारण भी साफ नहीं है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में किराया कम होता है जबकि कम दूरी की यात्री में किराया बढ़ जाता है।
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यात्रियों की बात
रोडवेज की बस पहले तो मिलती ही नहीं है, अगर मिलती है तो ठीक से चलती नहीं है। कई बार तो रास्ते में यात्रियों को बस में धक्का भी लगाना पड़ता है।
- सुधीर कुमार
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कई बार दिल्ली जाना होता है। बदायूं डिपो के चालक और परिचालक दिल्ली की आवाज लगाकर सवारियों को बस में बैठाते हैं लेकिन बस कौशांबी तक नहीं जाती है।
- नन्हे
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रोडवेज बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। पीने की पानी तक मयस्सर नहीं होता है। बसों में खिड़की दरवाजे नहीं हैं। अधिकारियों को सर्दियों का भी ख्याल नहीं है।
- अरविंद सिंह
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रोडवेज की बदायूं से दातागंज और बदायूं से फरुर्खाबाद के बीच चलने वाली ज्यादातर बसें खटारा हैं। कई बार बसें रास्ते में खड़ी होने पर धक्का लगाना होता है।
- वीरभान
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ज्यादातर बसों में ऑल वेदर बल्ब लगा दिए गए हैं। यह बात सही है कि टायर और अन्य तकनीकी कारणों से कुछ बस ब्रेकडाउन हो रहीं हैं। वर्कशॉप में संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। डिपो की कुछ पुरानी बसों की नीलामी होनी है। आकस्मिक कारणों से बसें रास्ते में खड़ी हो रही हैं। ऐसा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
- लक्ष्मण सिंह, एआरएम बदायूं डिपो