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ठंड में सफर को मुश्किल बना रहीं जर्जर बसें

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रोडवेज बस के पहिये में कम नट बोल्ट। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। सर्दियों ने दस्तक दे दी है। ऐसे में खस्ताहाल रोडवेज की बसों में रात के वक्त सफर करने वाले यात्री खासे परेशान हैं। परिवहन निगम के बदायूं डिपो को अब तक बसों की मरम्मत की याद नहीं आई है। बसों के शीशे टूटे हैं, फॉग लाइट की बात करें तो कई बसों में तो साधारण लाइट भी खराब हैं। खटारा बसों को बिना पूरे नट बोल्ट के सड़कों पर दौड़कर यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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बदायूं डिपो के बेड़े में कुल 168 बसें शामिल हैं। इनमें 131 बसें निगम की और बाकी अनुबंधित हैं। निगम की बसों की बात करें तो बूढ़ी हो चुकीं 50 बसों पर दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी है। इन खटारा बसों को दूसरे रूटों पर दौड़ाया जा रहा है। काफी बसों में शीशे नहीं हैं। कई तो ऐसी बसें भी हैं जिनमें लाइट तक नहीं है। फॉग लाइट डिपो की एक भी बस में नहीं है। बिना शीशे के रात में सड़क पर दौड़ने वाली बसों में यात्रियों को कंपकंपी छूटने लगी है। कई बसें तो ऐसी हैं जिनके पहियों में पूरे नट बोल्ट तक नहीं हैं। आठ के स्थान पर चार और पांच बोल्ट पर बसों को दौड़ाया जा रहा है, लेकिन कई रूटों पर रात में निजी बस सेवा न होने के कारण मजबूरन लोगों को इन बसों में सफर करना हो रहा है। दातागंज, फर्रुखाबाद रूट पर बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। अब तक डिपो के वर्कशॉप में खटारा बसों की मरम्मत का काम तक चालू नहीं हुआ है।
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कई प्रमुख रूट पर रात में नहीं मिलतीं बसें
- बदायूं-दातागंज, बदायूं-फर्रुखाबाद के लिए रात में बसें नहीं मिलतीं। इन रूट पर ज्यादा संख्या ग्रामीण यात्रियों की होती है। इसके अलावा बदायूं-कादरचौक, बदायूं-उसावां, बदायूं-बिल्सी रूट पर भी यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, बदायूं-बरेली और बदायूं-कासगंज के बीच रेल सेवा भी होने के कारण यात्रियों को इस रूट पर ज्यादा समस्या नहीं होती। बारिश के मौसम में डिपो की बसों की छतें टपकती हैं। इससे भी यात्रियों को परेशानी होती है।
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बिना लाइट, तीन बोल्ट पर चलती बस पकड़ने के बाद नोटिस
- हाल ही में बदायूं डिपो के एआरएम ने एक ऐसी बस को भी पकड़ा जिसके अगले पहिए में सिर्फ तीन बोल्ट थे। जबकि छह बोल्ट होने चाहिए। बिना लाइट के बस को भी पकड़ा था। इसके बाद संबंधितों को नोटिस दिया। बसों का सर्वे कराने और अगर कोई सामान कम है तो उसकी डिमांड के लिए भी वर्कशॉप प्रभारी को लिखा लेकिन अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, लाइट के मामले में एक कर्मचारी के वेतन से कटौती की कार्रवाई जरूरी की गई।
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सभी बसों की स्थिति को लेकर वर्कशॉप से रिपोर्ट मांगी है। फॉग लाइट के लिए मुख्यालय को डिमांड भेजी गई है। वर्कशॉप में काम करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की जा रही है। तीन बोल्ट पर चलती एक बस को पकड़ा था। लाइट के मामले में वेतन से कटौती की कार्रवाई की गई। बसों को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।
-लक्ष्मण सिंह, एआरएम
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यात्रियों की बात
रोडवेज बसों की दशा किसी से छिपी नहीं है। रोडवेज बस स्टैंड के पास ही डग्गामार वाहनों को भरा जाता है। डिपो के अधिकारी ध्यान नहीं देते। पुलिस चौकी का स्टाफ भी मौन रहता है।
-मोहित
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रात के वक्त रोडवेज बसों में यात्रा करना मुश्किल ही नहीं खतरनाक भी है। कई बार तो बस की लाइट अचानक रात में खराब हो जाती है। कई रूट पर खटारा बसें रास्ते में खड़ी होने से परेशानी होती है।
-सुनील गुप्ता
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बसों की दशा खराब होने के साथ बस स्टैंड की दशा भी खराब है। यात्री सुविधाओं का भी ध्यान नहीं रखा जाता, डिपो परिसर में गंदगी फैली रहती है। जगह-जगह जलभराव से समस्या होती है।
-रामचंद्र
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खटारा बसों को रात के वक्त दौड़ाना खतरे की बात है, लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते। वर्कशॉप कर्मचारियों से लेकर यात्रा के दौरान यात्रियों से चालक-परिचालक तक मनमानी करते हैं।
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-सुखपाल
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