बदायूं। चुनावी सीजन में केंद्र सरकार के बजट से बड़ी उम्मीद थी, जो फिलहाल टूटती दिख रही है। खासकर मध्यम वर्ग को टैक्स में छूट बढ़ने की उम्मीद भी चुनावी दौर का बजट पूरा न कर सका है। किसानों की ब्याज मुक्त ऋण की उम्मीद भी टूट गई। हालांकि जैविक खेती के प्रोत्साहन को लोगों ने अच्छा कदम बताया। लेकिन कारोबारियों को बजट में कुछ खास नजर न आया। जीएसटी पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बजट पर प्रतिक्रिया जानने के लिए हमने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश।
-
डिजिटल करेंसी सरकार का बड़ा कदम
यूं तो टैक्स स्लैब में बदलाव न करके सरकार ने मध्यमवर्ग को निराश किया है पर डिजिटल करेंसी की घोषणा सरकार का बड़ा कदम है। इसके लिए मैं सरकार को साधुवाद देता हूं। यह एक बहुप्रीतिक्षित कदम है जिसकी लंबे समय से देश में जरूरत महसूस की जा रही है। जिस तरह लोगों ने बिटक्वाइन में बड़ा पैसा कमाया है, उसमें भारतीय पिछड़ गए हैं। उस लिहाज से यह निसंदेह बड़े बदलाव का साक्षी होगा। अब लीगल ट्रेडिंग के अवसर भी इस करेंसी के चलन के साथ ही खुल जाएंगे।
- उपेंद्र गुप्ता, सीए
-
मध्यमवर्गीय करदाता को लगा झटका
इस बार केंद्र सरकार का बजट उस वक्त में आया है जब यूपी में चुनाव चल रहा है। ऐसे में प्रदेश व जिले के मध्यमवर्गीय करदाताओं को टैक्स में छूट की उम्मीद थी। न्यूनतम आयकर सीमा ढाई लाख है जो कम से कम पांच लाख होनी चाहिए। टैक्स स्लैब में पांच लाख के बाद सीधे बीस लाख से आकलन होता है। मध्यमवर्ग की पुरानी मांग है कि इसमें बीच में दस लाख का भी एक टैक्स स्लैब होना चाहिए। बजट में टैक्स के बदलाव को लेकर अपेक्षित उम्मीदों को इस बजट से झटका लगा है।
- एडवोकेट अर्जुन सिंह, कर सलाहकार
-
व्यापारियों के लिए कुछ खास नहीं
कोरोना के बुरे दौर से लोग अब भी जूझ रहे हैं। बड़े पैमाने पर व्यापार और व्यापारियों को कोरोना ने तबाह करने का काम किया है। व्यापारियों को उम्मीद थी कि कम से कम चुनाव के वक्त सरकार इस बजट से उन्हें कोई बड़ी राहत देगी। हालांकि बजट में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला जिससे व्यापारियों को कोई राहत मिलती। इसे अच्छा बजट तो नहीं कहा जा सकता।
- संतोष शर्मा, जिला प्रवक्ता, बदायूं उद्योग व्यापार मंडल
-
गन्ने का पेमंट डिजिटल हो
जिस तरह डिजिटल बजट पेश किया गया उसी तर्ज पर किसानों के गन्ने का पेमेंट डिजिटल किया जाना चाहिए। एमएसपी पर खरीदारी की सीमा भी बताई जाए। केवल खानापूर्ति की जाती है। एमएसपी पर जब तक कानून नहीं बनेगा तब तक किसानों के लिए कुछ नहीं मिलने वाला।
- राजेश सक्सेना, मंडलीय प्रवक्ता भाकियू
-
बजट में आम आदमी को राहत देने जैसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। युवाओं को बजट से काफी उम्मीद थी। बेरोजगारी बड़ी समस्या है। सरकार कह रही है कि साठ लाख नई नौकरी देगी। समझ नहीं आ रहा कि किन सेक्टर में इतने बड़े पैमाने पर नौकरी दी जा सकती हैं। पुरानी जितनी भर्ती निकलती हैं, सभी में कोई न कोई पेंच फंस जाता है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कोई काम किया जाता तो बेहतर होता।
- मोहित पांडेय, अधिवक्ता
-
सरकार ने रसायन मुक्त जैविक खेती को बढ़ावा देने की घोषणा बजट में की है। अगर वास्तव में धरातल पर कुछ ऐसा हो तो यह वाकई बड़ी उपलब्धि होगी। हालांकि अब तक किसानों के नाम पर बजट में लोक लुभावन घोषणाएं होती आई हैं। धरातल पर किसानों का उद्धार होना मुश्किल है जब तक इच्छाशक्ति न हो।
- रामाशंकर शंखधार, किसान नेता
-
सराफा कारोबार को कोई खास छूट नहीं मिली है। हीरे के गहनों पर छूट तो दी है लेकिन उसका ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। इसके अलावा टैक्स के स्लैब में वृद्धि नहीं की गई है। चुनावी माहौल में जिस का तरह का बजट आना चाहिए था, उसके अनुरूप सरकार ने कुछ नहीं किया है। सराफा व्यापार पहले की तरह सामान्य की रहेगा। सरकार को व्यापार हित में कदम उठाने चाहिए थे।
-संजय मित्तल, अध्यक्ष सराफा कमेटी उझानी
-
केंद्र सरकार का बजट आने वाले दिनों में बेरोजगारों को नौकरियां मुहैया कराने वाला लग रहा है। बजट में कई खूबियां भी है लेकिन सरकार व्यापारियों और आम आदमी के हित के अनुरूप कुछ और करती तो ज्यादा लाभदायक होता। सराफा व्यापार में एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किए जाने से मायूसी हाथ लगी है। एक्साइज ड्यूटी में बदलाव की उम्मीद की जा रही थी।
- आलोक अग्रवाल, व्यापारी नेता उझानी
-
बजट में मध्यम और निम्नवर्गीय लोगों के हित का ख्याल नहीं रखा गया है। रसोई गैस और पेट्रो पदार्थों की कीमत पहले से ही काफी बढ़ी हुई चल रही हैं। रसोई गैस सिलिंडर का रेट कम होना चाहिए था। कोरोना की तीसरी लहर के बाद लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। नौकरीपेशा लोगों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए था। माहौल चुनावी हो तो उम्मीदें बढ़ जाती हैं।
- सुभाष चंद्र मिनोचा, सेवानिवृत प्रवक्ता
-
केंद्रीय वित्तमंत्री ने बजट पेश करने से पहले कृषि क्षेत्र के उत्थान पर शायद गौर नहीं किया। किसानों को विशेष सहूलियत मिलनी चाहिए। कृषि क्षेत्र पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए थे लेकिन बजट ने किसानों को निराश कर दिया है। सरकार चाहती तो किसान हित में बहुत कुछ कर सकती थी।
- ध्रुव यादव, प्रगतिशील किसान
--
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ अनुसंधान किसी भी देश की बड़ी जरूरत है। इस बार बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मेक इन इंडिया पर जोर दिया गया है। विकास बजट का 68 फीसदी मेक इन इंडिया के लिए निर्धारित किया गया है। रक्षा में अनुसंधान के लिए 25 फीसदी बजट और उत्पादन का आयात कम करने की घोषणा आने वाले दिनों में देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी।
- ब्रजेश मिश्रा, सर्जेंट (रिटायर्ड) भारतीय वायु सेना
-
टैक्स स्लैब में किसी बदलाव की उम्मीद भी नहीं थी। कोराना का साया बजट पर है। हालांकि, सरकार ने करदाताओं को दो साल में अपने रिटर्न को अपडेट करने की अनुमति दी है। राज्य सरकार के कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम में योगदान पर टैक्स छूट का भी प्रावधान किया गया है।
-जगदीश सरन पूर्व डिप्टी कमिश्नर कस्टम
-
सराफा कारोबार को बजट से कोई खास उम्मीद नहीं थी, लेकिन इतना भी नहीं सोचा था कि नए प्रावधानों से सोने की कीमतों में इजाफा होगा। बजट प्रावधानों में सराफा व्यापार को झटका लगा है। कोराना की पहली लहर से ही सराफा कारोबार की कमर टूटी हुई है। बजट ने निराश किया है।
-सचिन वर्मा, सराफा व्यापारी
-
वाहन बाजार को बजट से खास फायदा नहीं होगा। केवल इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बैटरी स्वाइपिंग पॉलिसी को लागू करने की बात की गई है, इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। डीजल-पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को कुछ खास नहीं है।
- अनुपम जिम्मी, ऑटो मोबाइल व्यापारी
-
केंद्रीय कर्मचारियों का तो सरकार ने ध्यान रखा है, लेकिन राज्य कर्मचारियों को बजट से जो उम्मीदें थीं वे पूरी नहीं हो सकी हैं। हालांकि, यह पहले से अंदेशा था कि कोराना का असर बजट पर होगा। पिछले वर्ष भी राज्य कर्मचारियों के हाथ लगभग खाली रह गए थे।
- प्रदीप चतुर्वेदी, राज्य कर्मचारी
-
छोटे और मझोले व्यापारियों, मजदूरों को लेकर बजट में सिर्फ घोषणाएं होती हैं। बजट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन इतना पता है कि बेरोजगारी बढ़ रही है। व्यापारी भी परेशान है। सरकार को प्राथमिकता के साथ महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण करना चाहिए।
- शब्बन मियां, आटा व्यापारी
-
महंगाई पर नियंत्रण हो जाए और बेरोजगारी पर काबू हो तो बजट में नए-नए प्रावधान करने की जरूरत नहीं होगी। आम आदमी साल भर बजट का इंतजार करता है, लेकिन उनको मिलता कुछ खास नहीं है। पिछले वर्ष के प्रावधान को ही देख लें कितने कारगर हुए हैं।
-नीरज कुमार, लघु व्यवसायी
-
महिलाएं सिर्फ घर नहीं संभालती, अब व्यापार भी संभाल रही हैं। महंगाई के कारण घर संभालने में समस्या है और कोराना संक्रमण के काल से व्यापार को प्रभावित किया है। सरकार तो जनहित में अच्छा कर रही है, लेकिन महंगाई पर नियंत्रण नहीं हो रहा। इससे हर वर्ग परेशान है।
-उर्मिला शर्मा, व्यापारी
-
बजट में केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाकर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। पिछले वर्ष केंद्रीय कर्मचारियों को खास नहीं मिला था। बैंक कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलित थे। सरकार ने बैंक कर्मचारियों को साधने की कोशिश की है।
-जगन्नाथ प्रसाद, रिटायर्ड बैंक कर्मी
-
गृहिणियां तो महंगाई से परेशान हैं। बजट में कुछ चीजों को सस्ता किया गया है, लेकिन जो रसोई के लिए जरूरी चीजें हैं उनको भी सस्ता किया जाना चाहिए था, लेकिन बजट में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है। पिछले वर्ष भी बजट में कुछ खास नहीं था।
-अंजली, गृहिणी
-
बजट के कुछ बिंदुओं को टीवी पर देखा था, टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कोई टैक्स भी कम नहीं किया गया है। महंगाई को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत थी, लेकिन इस दिशा में भी निराशा मिली है। आने वाले समय में सरकार से उम्मीदें भी हैं।
-सोनल, शिक्षिका
-
बजट को लेकर जो बातें कही जा रही हैं उससे कहीं ज्यादा उम्मीद थी। प्रदेश में चुनाव का माहौल है, लेकिन सरकार ने हाथ तंग रखे हैं। महंगाई पर काबू के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि, समझा जा सकता है कि बजट पर कोराना काल का असर अब भी है।
-अनुविशा, गृहिणी
-
व्यापार में पति का हाथ बंटाने के साथ घर भी संभालना होता है। महंगाई के कारण खर्च पूरे नहीं होते इसके चलते मैं भी ट्यूशन पढ़ाती हूं। सरकार को महंगाई को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत थी। इस बार बजट से उम्मीद थी, लेकिन बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
-सरला, शिक्षिका
-
60 लाख नौकरियों का वायदा सिर्फ वायदा न रहे
बदायूं। सरकार ने बजट में 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया है। युवाओं और बेराजगारों में इसको लेकर खुशी तो है, लेकिन उनको यह भी कहना है कि इस तरह के वायदे पहले भी किए जाते रहे हैं। इसके बाद भी देश में बेरोजगारी चरम पर है। बजट को लेकर बेरोजगार युवाओं से बात करने पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।
-
महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। बजट में सरकार ने 60 लाख नई नौकरियों की बात कही है। यह भी बताना चाहिए था कि इससे पहले कितनी नौकरियां दीं।
-दुर्वेश
-
चुनाव का दौर है, घोषणाएं तो होनी ही थीं, महंगाई को रोकने के लिए सरकार ने क्या क्या, बेरोजगारी 60 लाख लोगों को नौकरियां देने से दूर नहीं होगी। स्व रोजगार के अवसर भी बढ़ने चाहिए।
-राकेश
-
बेरोजगारी को लेकर सरकार को पहले से ठोस कदम उठाने चाहिए थ। अब बेरोजगारी 60 लाख नौकरियों से दूर नहीं होगी। जो लोग नौकरी के लिए आयु सीमा पार कर चुके हैं उनके लिए क्या हुआ।
- संजीव
-
बेरोजगारी के साथ महंगाई पर भी काबू की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, 60 लाख नई नौकरियां किस आयु वर्ग के लोगों को कब दी जाएंगी यह भी बताना चाहिए था।
-अरविंद सिंह