बिल्सी। ईंट निर्माण के लिए प्रयोग होने वाले कोयले पर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर जीएसटी 18 प्रतिशत कर दी गई है। इससे ईंटों के दामों में उछाल आएगा। कारण, कोयले से ही ईंटों को पकाया जाना है। कारोबारियों का कहना है कि पुराना माल खत्म होने के बाद नए बने माल पर महंगाई की असर दिखने लगेगा। वहीं इससे निर्माणाधीन पीएम आवास भी प्रभावित होंगे।
लाल ईंट का निर्माण प्रमुख ईंधन कोयला है। इस पर पूर्व में जीएसटी 5 थी, जो अब 18 फीसदी कर दी गई है। इससे परोक्ष रूप से टैक्स बढ़ गया है। साथ ही कोयले पर जो भाड़ा आएगा, उस पर पहले से ही जीएसटी 5 फीसदी थी, जिसे बढ़ाकर अब 18 प्रतिशत कर दिया गया है। अतिरिक्त टैक्स लगने से ईंटें महंगी होंगी।
दाम बढ़ने का प्रभाव निम्न आय वर्ग के लोगों और गरीबों पर पड़ेगा। पीएम आवास भी इससे प्रभावित होंगे। बिल्सी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक ईंट-भट्टे हैं। यहां ईंटों का निर्माण लंबे समय से काफी व्यापक स्तर पर चल रहा है। मालिकों को जीएसटी बढ़ने के बाद कारोबार की चिंता सताने लगी है।
-ईंट निर्माता बोले- लागत बढ़ने से दाम बढ़ाना हमारी मजबूरी
हाल ही में कोयले पर जीएसटी बढ़ने से ईंट निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। मजबूरी में ईंटों की कीमतों में इजाफा करना पड़ जाएगा। - नरेंद्र बाबू वार्ष्णेय
कोयले के बिना ईंटों का निर्माण हो पाना संभव नहीं है। इसलिए कोयला पर जीएसटी बढ़ने से ईंटें भी आने वाले समय में महंगी हो सकती हैं। -रजनीकांत अग्रवाल
जब भी बाजार में ईंट निर्माण में प्रयोग होने वाली वस्तुओं में किसी तरह की वृद्धि होती है तो ईंट के दाम भी उसी हिसाब से बढ़ जाते हैं। इससे कीमतें भी बढ़ सकती हैं। -सुवीन मालपानी
सरकार ने कई वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम कर जनता को कहीं न कहीं लाभ देने का काम किया है। मगर, कोयले पर 5 से 18 प्रतिशत जीएसटी करने के बाद जनता पर इसका अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ेगा। इससे कोयले से तैयार होने वाली ईंटें महंगी हो जाएंगी। - मयंक मालपाणी
मंयक मालपाणी
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मंयक मालपाणी
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