भाकियू जिलाध्यक्ष केपीएस राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार हिटलर शाही रवैया अपना रही है। किसानों को आंदोलन करते करीब 10 से 11 महीने हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने एक भी बार किसानों से बात नहीं की।
बदायूं में भारतीय किसान यूनियन असली गैर राजनीतिक ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को सिलहरी बिजली घर के समीप प्रदर्शन किया। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने एवं बिजली बिल अधिनियम को लेकर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया है। भाकियू पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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जिलाध्यक्ष केपीएस राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार हिटलर शाही रवैया अपना रही है। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों को आंदोलन करते करीब 10 से 11 महीना हो चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने एक भी बार किसानों से बात नहीं की। जबकि किसान अपना हक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून बनाने को जोर दे रहे हैं। सरकार किसानों की फसल को खरीदने के लिए उसका मूल्य तय करती है।
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'सरकार सुनने को तैयार नहीं किसानों की बात'
किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों की फसल का जो भाव तय किया है, उससे कम मूल्य पर कोई भी न खरीदे और अगर कोई खरीदता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। यही कानून बनाने को लेकर किसान अड़े हुए हैं। इसी को लेकर सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल आमरण अनशन पर बैठे हैं, जो करीब 45 से 48 दिन से धरने पर हैं। लेकिन केंद्र सरकार सुनने को तैयार नहीं है।
इसी तरह से सरकार ने वादाखिलाफी करते हुए डॉक्टर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू नहीं की। हर व्यापारी अपनी वस्तु का भाव खुद तय करता है। अन्नदाता कहे जाने वाला किसान अपनी फसल का भाव स्वयं तय नहीं कर पा रहा है। उसकी फसल का भाव बिचौलिया दलाल तय करते हैं। जिससे उसकी फसल की लागत भी नहीं निकल पाती है और किसान कर्जदार होता जाता है।
युवा जिला अध्यक्ष ऋषभ चौधरी ने कहा कि किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए और बिजली बिल अधिनियम 2022 को शीघ्र ही सरकार रद्द करे। किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए। इस मौके पर रविंद्र सिंह पटेल, रविंद्र सिंह, सूरजपाल सिंह ,जसवीर यादव, अशोक सिंह, राजपाल सिंह हरीश पटेल, कमल गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।