बदायूं। जिले के स्कूली बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। पहले जहां प्रमाणपत्र के लिए तीन गवाह या अभिभावकों के शपथपत्र आवश्यक होते थे, वहीं अब केवल एक शपथपत्र के आधार पर ही जन्म प्रमाणपत्र जारी होगा। प्रशासन का यह कदम बच्चों को डीबीटी योजना का लाभ समय पर दिलाने और अभिभावकों की परेशानियों को कम करने की दिशा में उठाया गया है।
शासन द्वारा संचालित डीबीटी योजना (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के तहत कक्षा एक से आठ तक के नामांकित बच्चों को 1200 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में सीधे भेजी जाती है। इस धनराशि का उपयोग बच्चों के लिए निशुल्क यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्टेशनरी और स्कूल बैग आदि की खरीद में किया जाता है।
योजना का लाभ दिलाने के लिए बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र होना आवश्यक है, लेकिन कई विद्यालयों में नामांकित बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में कठिनाइयां सामने आ रहीं थीं। पहले नियम के अनुसार कक्षा एक में प्रवेशित बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तीन अभिभावक/गवाहों के शपथ पत्र आवश्यक थे। इस प्रक्रिया में देरी और अभिभावकों की परेशानी को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
अब कक्षा एक में नामांकित बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र केवल एक अभिभावक या गवाह के शपथ पत्र के आधार पर ही बनाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अथवा उपजिलाधिकारी द्वारा सत्यापन कराया जाएगा। -वीरेंद्र कुमार सिंंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी