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वन में भी भू-माफिया ने कर लिया कब्जा!

Thu, 08 Jan 2015 07:52 PM IST
दातागंज (बदायूं)
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महाभारत काल का गवाह हडौरा का वन अब सिर्फ नाम का रह गया है। भू-माफिया ने पेड़ और झील झांकड़ साफ करके जमीन पर कब्जा कर लिया है और शिकारियों ने यहां विचरने वाले पशु पक्षियों को मार दिया है। संज्ञान में होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की चुप्पी आमजन को अखर रही है।
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तीन चार दशक पूर्व डहरपुर-म्याऊ मार्ग पर सैंजनी गांव से निकलते ही घना जंगल शुरू हो जाता था। मीलों तक फैले इस जंगल के बीच से कच्चा रास्ता म्याऊ तक जाता था। इस रास्ते पर दिन में भी एक दो लोग चलने का साहस नहीं जुटा पाते थे। जंगली जानवरों और पड़ोसियों से जंगल गुंजायमान रहता था। बताते हैं कि महाभारत काल में यह हिडम्बा का वन कहलाता था।

यहां हिडम्बा राक्षसी का साम्राज्य था। अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपना कुछ समय यहां बिताया। भीम ने हिडम्बा से यहीं विवाह किया था। कालांतर में इसका नाम बदलकर हडौरा की चौकी हो गया। डहरपुर-म्याऊ मार्ग पर आवागमन बढ़ने से जंगल के हिंसक जानवर किनारा कर गए। हिरन, खरगोश, नीलगाय, जंगली गाय और यहां हजारों की संख्या में थे। पांच-छह साल पहले हिरनों के झुंड सड़क तक पर कुलाचें भरते थे।
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आसपास के दबंग लोगों ने जंगल की सैकड़ों वीघा जमीन पर कब्जा कर लिया और पेड व झील झांकड़ काटकर उस पर खेती करने लगे। शिकारियों के लिए भी यह जंगल रास आ गया। क्षेत्रीय शिकारियों के अलावा रामपुर और संभल आदि अन्य जिलों के शिकारियों ने यहां जानवरों को मारना शुरू कर दिया। नियमत: वन विभाग को अवैध कब्जा धारकों और शिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने नहीं की।

अलबत्ता आसपास के गांव वाले कभी-कभार शिकारियों से टकराते रहते हैं। कोड़ा जयकरन गांव के लोगों ने संभल के शिकारियों को कई बार खदेड़ा। ढका गांव के निकट ग्रामीणों ने दुलर्भ प्रजाति के सल्लू सांप के जोड़े को मुक्त कराया। हाल में करीमपुर गांव के लोगों ने शिकारियों को खदेड़कर गोली से मारे गए काले हिरन समेत एक शिकारी को भी पकड़ लिया।

काले हिरन की शिकार पर ज्यादा किरकिरी होने पर वन विभाग ने नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि वन विभाग शुरू से ही कड़े कदम उठाता तो वन संपदा भी बची रहती और वन्य जीवों की भी धमाचौकड़ी बनी रहती है।
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