मंडलीय अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से दातागंज, सालारपुर और अंबियापुर ब्लाक क्षेत्र में गोद लिए गांवाें का निरीक्षण किया और लौट गए। मंडल स्तर पर इन अधिकारियों ने जिले के 23 गांवों को गोद लिया है। वह गांव में कुपोषित बच्चों के मामले में समीक्षा करने आए थे। मंडल स्तर से भी अधिकारी जिले के गांवों में कुपोषण दूर कराने में अपनी भूमिका निभाएंगे। इससे जिले में कुछ गांवों में तो कुपोषण पर नियंत्रण होगा ही।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी और सीडीओ ने कुपोषित बच्चों वाले गांवों की सूची में सबसे ऊपर रहने वाले दो-दो गांव गोद लिए हैं। स्वास्थ्य और बाल विकास को साथ लेकर इन गांवों में बच्चों से कुपोषण दूर किए जाने के प्रयास होंगे। जिला, तहसील और ब्लाक स्तर 93 गांव पहले ही गोद लिए जा चुके हैं। इस प्रकार अबतक 122 कुपोषित बच्चों वाले गांव गोद लिए जा चुके हैं।
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अधिकारियों के गोद लेने का अब तक का प्रभाव
जिन अधिकारियों ने कुपोषित बच्चों के गांव घूमे हैं, उनमें बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग सचेत हो गया है। बाल विकास योजना जो पटरी पर नहीं थी, वह इन गांवों में पटरी पर आने लगी है। स्वास्थ्य विभाग भी सचेत हो गया है। गांव की एएनएम को अपनी जिम्मेदारियों की सुध आ गई है।
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जो गांव कुपोषण के लिए चिह्नित किए गए थे, उन गांवों से पहले माह में कुपोषण संबंधी रिपोर्ट मंगाई जाती थी अब हर पखवाड़े रिपोर्ट मंगाई जा रही है। सभी कुपोषित बच्चों वाले गांवों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। - निर्मला शर्मा,डीपीओ बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग