कादरचौक। कादरचौक के 14 गांवों में एक दिन पहले रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसे देखते हुए बहनों के आने का क्रम शुरू हो गया है। इसको भटेले परंपरा कहा जाता है।
देशभर में नौ अगस्त को रक्षा बंधन मनाया जा रहा है, लेकिन कादरचौक इलाके के 14 गांवों में यह उत्सव आठ अगस्त को ही मना लिया जाएगा। महान योद्धा आल्हा-ऊदल के जमाने से चली आ रही परंपरा को स्थानीय लोग शिद्दत के साथ निभाते आ रहे हैं। जन श्रुति के आधार पर स्थानीय जमींदार महोबा शासक के अधीन थे। ठाकुर सोरन सिंह, वीरेंद्र सिंह, लाखन सिंह यादव की जमींदारी में 14 गांव आते थे। पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था। उस समय महोबा पर चंदेल शासक परमार का राज था। उनकी रानी चंद्रबली ने मुंहबोले भाई आल्हा से अपनी व राज्य की सुरक्षा की मांग की। लड़ाई रक्षाबंधन वाले दिन गंगा तट पर होनी तय थी। ऐसे में आल्हा की पहल पर रक्षाबंधन एक दिन पहले ही मनाने की घोषणा कर दी गई। इसके अगले दिन वह युद्ध में शामिल होने चले गए। त्योहार खोटा न हो जाए इसलिए एक दिन पहले ही मनाकर भुंजरिया सिराई ली गईंं। सदियों पुरानी परंपरा को आज भी कादरचौक, लभारी, चौडेरा, मामूरगंज, गढि़या, ततारपुर, कचौरा, देवी नगला, सिसौरा, गनेश नगला, कलुआ नगला, किशूपुरा, सिमरा और बालजीत नगला गांव के लोग निभाते चले आ रहे हैं।
- एक दिन पहले रक्षाबंधन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बहाने अपने पूर्वजों की गाथा को भी हम लोग ताजा बनाए रखते हैं। यह परंपरा चंदेल वंश, आल्हा और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ी है।
-विवेक मिश्रा, लभारी
- महोबा शासन में यहां के जमींदार आल्हा के साथ थे। उसी युद्ध में जाने की वजह से एक दिन पहले त्योहार मनाया था, जो अब तक चला आ रहा है। आल्हा ऊदल के इतिहास से संबंधित पुस्तक में इसका प्रसंग है। - देवेंद कुमार, कादरचौक
देवेंद्र कुमार, कॉलेज प्रबंधक।- फोटो : samvad
देवेंद्र कुमार, कॉलेज प्रबंधक।- फोटो : samvad