उझानी/ कछला। सोमवार सुबह में शिव मंदिरों में जलाभिषेक से पहले शिवभक्तों ने गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाकर कांवड़ पूजन किया। उसके बाद जल लेकर शिवालयों के निकल पड़े। इससे पहले रातभर घाट से जल लेने का क्रम चलता रहा।
कछला गंगाघाट पर कांवड़ियों के आने और जल भरकर शिव मंदिरों की ओर जाने का सिलसिला सोमवार सुबह तक चला। हालांकि कांवड़िये दिन में भी चले, लेकिन रात में उनकी संख्या सबसे ज्यादा रही। टोलियों में शामिल कांवड़ियों ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद घाट पर ही पूजा- अर्चना की। ऐसा कोई टोली नहीं थी, जिसमें कांवड़ियों की संख्या 40- 50 से कम रही हो। कांवड़ यात्रा के दौरान घाट से लेकर हाईवे तक भोले के जयकारे गूंजते रहे। टोलियों में शामिल कांवड़ियों में बदायूं के नेकपुर निवासी बाइक सवार चंद्रपाल ने बताया कि सावन महीने के तीसरे पड़ाव को पूरा करने के लिए भोले के भक्तों की संख्या कम नहीं रही। डीजे साउंड सिस्टम लगे वाहनों के पीछे थिरकते कांवड़ियों का सेवादारों ने भी हौसला बढ़ाया। कमोवेश ऐसा ही नजारा गंगा पार के कांवड़ियों के कासगंज की ओर कूच करते समय देखने को मिला। कासगंज, एटा और हाथरस आदि के कांवड़ियों ने भी कांवड़ यात्रा शुरू की।
डीजे संग कांवड़ियों का शक्ति प्रदर्शन देख छूटा पुलिस का पसीना
- कांवड़ यात्रा के दौरान रविवार रात करीब नौ बजे कांवड़ियों के टोलियों के साथ डीजे साउंड सिस्टम का दर्शकों ने भी लुत्फ उठाया। बाइपास पर कांवड़ियों की दो टोलियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का माहौल बना तो पुलिस कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। चश्मदीद श्यामपाल ने बताया कि शक्ति प्रदर्शन से अन्य टोलियों के कांवड़ियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
-
कोतवाली में मौजूद कांवड़ को जलाभिषेक का इंतजार
चार दिन पहले सड़क हादसे में कांवड़िया अंकित की मौत और दूसरी टोली की डीजे लगी ट्रैक्टर- ट्रॉली में आगजनी के बाद एक शिवभक्त की कांवड़ कोतवाली में रखवा दी गई थी। दोनों में से किसी भी टोली के कांवड़िया ने अभी तक कांवड़ नहीं उठाई है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि कांवड़ सुरक्षित रखी है। इसके अलावा रविवार रात सड़क हादसों में घायल कांवड़ियों में से किसी की कांवड़ अस्पताल में छूट गई। उसे एक मंदिर में रखवा दिया गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान रेलवे फाटक खुलने के इंतजार में खड़े कांवड़िये। संवाद
कांवड़ यात्रा के दौरान रेलवे फाटक खुलने के इंतजार में खड़े कांवड़िये। संवाद
कांवड़ यात्रा के दौरान रेलवे फाटक खुलने के इंतजार में खड़े कांवड़िये। संवाद