जिला अस्पताल का नेत्र रोग विभाग। संवाद
बदायूं। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के नाम पर जिला अस्पताल में चल रहे वसूली के खेल में डॉक्टरों के साथ स्टाफ भी शामिल है। मरीज को कोई भी यह नहीं बताता कि लेंस सरकार द्वारा मुफ्त में दिए जाते हैं। मामला पकड़ में न आए, इसलिए इन लेंसों को अंदर ऑपरेशन थियेटर में ही रखा जाता है। यहां डॉक्टर व स्टाफ के अलावा कोई आ नहीं सकता। इसलिए पकड़े जाने का भी डर नहीं रहता।
बता दें कि जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। चूंकि ये ऑपरेशन ठंड में ही किए जाते हैं, इसलिए दिसंबर से ऑपरेशन शुरू हो गए थे। शुरू में जिला अस्पताल के नेत्र विभाग के डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने शासन को इंडेंट भेज रखा है। दवाएं व लेंस नहीं आए हैं। बाद में बताया कि दवा व लेंस आ गए हैं। मरीजों का पहले ही पंजीकरण करा लिया गया था।
उधर, सीएमओ रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि इस मामले में जांच कराई जाएगी। लेंस व दवाएं मरीजों के लिए पूरी तरह से मुफ्त हैं। अगर मरीजों से रुपये लिए गए हैं तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
इधर, एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें बुजुर्ग के रिश्तेदार बता रहे हैं कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान लेंस के नाम पर डेढ़ हजार रुपये लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि लेंस अंदर ऑपरेशन कक्ष में रखे जाते हैं। यहां मरीजों से पूछा जाता है कि कौन सा लेंस लगवाना है। मरीज को एक-डेढ़ हजार से तीन-चार हजार रुपये तक के लेंस बताए जाते हैं। खुद मरीज को नहीं पता होता कि अच्छा लेंस कौन सा है। वह स्टाफ व डॉक्टर की बात पर भरोसा करके रुपये दे देता है।
लेंस के नाम पर वसूली का मामला गंभीर है। इस मामले में जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- डा. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ