-पैतृक गांव बरातेखदार में जश्न का माहौल, मिठाई बंटी
-महर्षि विद्या मंदिर और नाइटेंगिल स्कूल में पढ़े हैं विकल्प
जिले के विकल्प भारद्वाज का चयन संघ लोकसेवा आयोग की भारतीय सिविल सेवा के लिए हो गया है। खास बात यह कि उन्होंने यह उपलब्धि 85 वीं रैंक के साथ हासिल कर बदायूं के लिए रिकॉर्ड बनाया है। विकल्प जिले के बरातेखदार गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने कक्षा छह तक की पढ़ाई शहर के महर्षि विद्या मंदिर से की और 12 वीं नाइटेगिंल स्कूल से। इसके बाद वह आईआईटी दिल्ली चले गए। बीटेक करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और इस साल दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की।
संघ लोकसेवा आयोग से भारतीय सिविल सेवा का फाइनल का रिजल्ट घोषित होने के बाद विकल्प के पैतृक गांव में जश्न का माहौल है। परिवार वालों ने इस उपलब्धि पर गांव में मिठाई बांटी। रोडवेज में परिचालक उनके चाचा अवधेश शर्मा ने भतीजे की कामयाबी को अपने खानदान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि विकल्प ने हम सबका बड़ा सपना साकार किया है। अवधेश ने बताया कि भारतीय सिविल सेवा के पहले प्रयास में विकल्प इंटरव्यू तक पहुंच गए थे लेकिन दूसरे प्रयास में वह कामयाब हो सके। रिजल्ट आया तो विकल्प दिल्ली में थे। उनके पिता अरविंद कुमार मुरादाबाद आवास विकास में अवर अभियंता हैं। उनके एक चाचा शशिकांत शर्मा वजीरगंज में एडीओ पंचायत के पद पर कार्यरत हैं।
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इरादे मजबूत हों तो कुछ भी असंभव नहीं
छह फरवरी 1992 केे जन्मे विकल्प का मानना है कि इरादे मजबूत हों तो कुछ भी असंभव नहीं होता। इसी जज्बे के साथ उन्होंने आईएएस में कामयाबी हासिल की है। लक्ष्य बनाकर उसके प्रति पूर्ण समर्पण ही उनका मूलमंत्र रहा। हां परिवार का पूरा सहयोग उनको मिला। आइआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद उन्होंने पहले प्रयास में सिविल सर्विस में इंटरव्यू तक पहुंचकर दिखा दिया लेकिन दूसरे प्रयास के लिए प्रयास जारी रखा और 85 वीं रैंक से कामयाबी हासिल कर अपना और परिवार का सपना साकार कर दिखाया। उनके पापा अरविंद कुमार भारद्वाज ने बताया कि उनके बेटे की कामयाबी उसकी निष्ठा और लगन का नतीजा है। विकल्प की बड़ी बहन रिचा की शादी हो चुकी है।
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स्कूलों ने भी खुशी जताई
महर्षि विद्या मंदिर की प्रिंसिपल डॉ. रोचन रावत ने कहा कि विकल्प की सफलता से हमारे कॉलेज का नाम भी ऊंचा हुआ है। हम ऐसे होनहार छात्रों के लिए शुभकामनाएं देते हैं। विकल्प की तर्ज पर बाकी छात्र भी कामयाबी हासिल कर सकेंगे। वहीं, नाइटेंगिल स्कूल के फाउंडर सरला स्वरूप का कहना है कि विकल्प की सफलता पर हमें नाज है। ऐसे बच्चे हमारे कॉलेज के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं।