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बिल्सीः भाजपा और बसपा में कड़ा मुकाबला

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बदायूं। बिल्सी विधानसभा सीट को लेकर जहां त्रिकोणीय मुकाबले की बात कही जा रही थी, उसे शर्त लगाने वालों ने दोतरफा मान लिया है। सर्वाधिक दांव यहां भाजपा व बसपा पर ही लग रहे हैं। सपा के पूर्व सांसद ने दूसरी सीटों के साथ बिल्सी में भी जीत का दावा किया है।
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एग्जिट पोल के नतीजों के बाद जिले की सर्वाधिक चर्चित सीट बिल्सी को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। बिल्सी से पहले आरके शर्मा भाजपा के विधायक थे जो चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर सपा में चले गए और आंवला से पूर्व मंत्री धर्मपाल सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी जगह पार्टी ने अपने संगठन के नेता हरीश शाक्य को टिकट दिया था जो विद्यार्थी परिषद के वक्त से भाजपा से जुड़े हैं। हरीश से बात की तो उन्होंने अपनी जीत को सुनिश्चित बताया। कहा कि भाजपा किसी एक जाति या वर्ग की पार्टी नहीं है। यहां मुस्लिमों को भी राशन भरपूर मिला है तो सबके वोट से विधायक बनेंगे। हरीश का मुख्य मुकाबला बसपा की ममता शाक्य से माना जा रहा है। ममता का कहना है कि वही इकलौती स्थानीय प्रत्याशी यहां हैं। इसलिए लोगों ने उन्हें बेटी मानकर वोट दिया है। मतगणना बता देगी कि बाहरी प्रत्याशियों को लोगों ने जीतने लायक वोट नहीं दिया है। उधर, सपा व महान दल गठबंधन प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मौर्य का दावा है कि सपा गठबंधन को बड़ी जीत मिलेगी। वहीं कांग्रेस के अंकित चौहान भी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आते हैं।
बिल्सी सीट का रुझान भी कुछ ऐसा ही रहा है कि यहां हर बार नया विधायक ही बनता है। आरके शर्मा 2017 में यहां चुनाव जीते। इससे पहले हाजी बिट्टन 2012 में यहां विधायक बने जो अब सहसवान सीट से लड़ रहे हैं। उससे पहले बिल्सी सुरक्षित सीट थी। यहां कांग्रेस चुनाव जीतती रही और अनुसूचित वर्ग के विधायक बनते रहे। संवाद
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