बदायूं। लंबे समय तक सपा के कब्जे में रही बदायूं एमएलसी सीट पर पहली बार भाजपा ने कब्जा किया है। सपा प्रत्याशी सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने के बाद भाजपा के वागीश पाठक का निर्विरोध एमएलसी बनना तय हो गया है। उनको बस प्रमाण पत्र मिलना बाकी है।
यहां बता दें कि बदायूं एमएलसी सीट पर एक बार बसपा प्रत्याशी के रूप में जितेंद्र यादव सन 2010 में जीत दर्ज कर चुके हैं। 2016 में जितेंद्र यादव ने भाजपा से और बनवारी सिंह यादव ने सपा से चुनाव लड़ा। इस बार बनवारी सिंह ने फिर से सीट पर कब्जा कर लिया। जितेंद्र यादव ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बनवारी सिंह यादव का 2017 में निधन हो गया। मामला कोर्ट में होने के कारण इस सीट पर चुनाव नहीं हो सका। पांच साल से एमएलसी सीट खाली थी। इस बार भाजपा ने वागीश पाठक को मैदान में उतरा और सपा ने जून 2021 में सपा में शामिल हुए दातागंज से दो बार विधायक रहे सिनोद शाक्य को मैदान में उतारा। अब तक माना जा रहा था कि जिस तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा ने सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य को प्रत्याशी बना कर भाजपा की वर्षा यादव को कड़ी टक्कर दी थी, उसी तरह इस बार सिनोद शाक्य के जरिये एमएलसी पद पर सपा, भाजपा के वागीश पाठक को टक्कर देगी। सोमवार को नामांकन दाखिल करने के बाद से ही दोनों दलों ने मतदाताओं की घेराबंदी शुरू कर दी थी।
बृहस्पतिवार को नाम वापसी के अंतिम दिन से पहले ही बुधवार को सिनोद शाक्य ने पर्चा वापस लेकर न सिर्फ राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया, बल्कि भाजपा के वागीश पाठक के निर्विरोध एमएलसी बनने का रास्ता भी साफ कर दिया। इसके साथ ही बदायूं एमएलसी सीट पहली बार भाजपा के खाते में चली गई। सपा के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
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सिनोद हो सकते हैं भाजपा में शामिल, मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
बदायूं। सपा प्रत्याशी के रूप में एमएलसी पद के लिए नामांकन कराने वाले पूर्व विधायक सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि सिनोद शाक्य अब भाजपा में शामिल हो सकते हैं। पार्टी में उनको जिम्मेदारी भी मिल सकती है। इसके साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में वह या उनकी पत्नी सुनीता शाक्य भाजपा से प्रत्याशी भी हो सकते हैं। एमएलसी चुनाव में भाजपा को वॉकओवर देकर कई संकेत दे दिए हैं।
दातागंज विधानसभा सीट से 2007 और 2012 में विधायक चुने गए सिनोद शाक्य 2017 में चुनाव हार गए थे। इसके बाद कुछ दिन वह बसपा में बने रहे। कुछ समय बाद बसपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में उनको निष्कासित कर दिया। बसपा से निष्कासित होने के बाद सिनोद शाक्य काफी समय तक राजनीतिक अज्ञातवास में रहे।
पंचायत चुनाव के समय वह भाजपा के संपर्क में आए। वह अपनी पत्नी सुनीता शाक्य को भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाना चाहते थे। उनकी और भाजपा नेताओं की बात अंदरखाने चलती रही, लेकिन बात नहीं बनीं। इसके बाद सिनोद जून 2021 में सपा में शामिल हो गए। सपा ने उनकी पत्नी सुनीता शाक्य को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ाया। एमएलसी चुनाव में उन पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया। ऐन मौके पर उन्होंने पर्चा वापस लेकर भाजपा के प्रति अपनी वफादारी दिखा दी है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सिनोद के भाजपा में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई हैं। हालांकि, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इसको लेकर अभी कुछ बोलने से इनकार कर दिया है। सिनोद शाक्य किसी से बात नहीं कर रहे हैं। चर्चा है कि सरकार गठन के बाद सिनोद को बाकायदा पार्टी में शामिल किया जाएगा। उन्हें दर्जा राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।
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वागीश बोले- सपा दे रही थी धोखा, भाजपा की नीतियों से प्रभावित हैं सिनोद
जिले का चहुंमुखी विकास प्राथमिकता से कराने का दोहराया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सपा प्रत्याशी सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने के बाद भाजपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। निर्विरोध एमएलसी चुने जाने का रास्ता साफ होते ही भाजपा के वागीश पाठक के आवास पर समर्थक जुटने लगे। वागीश ने यहां पत्रकारों से भी बात की, संकेत दिए कि सिनोद पार्टी नेताओं के संपर्क में थे। यह भी कहा कि सिनोद से उनकी कोई बात नहीं हुई।
वागीश पाठक ने कहा कि जिले का चहुंमुखी विकास होगा। शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता होगी। सिनोद के नामांकन वापस लेने के संबंध में सवाल करने पर वागीश ने कहा कि सपा सिनोद को धोखा दे रही थी, वह भाजपा की नीतियों से प्रभावित थे। भाजपा की नीतियों पर भरोसा दिखाते हुए उन्होंने नामांकन वापस लिया है। सिनोद के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर वागीश ने कहा कि हो सकता है वह एक दो दिन में भाजपा में शामिल हो जाएं। उनकी पार्टी नेताओं से बात हुई होगी। इस बारे में वागीश ने ज्यादा कुछ बोलने से इनकार कर दिया।
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आस लगाए बैठे मतदाता मायूस, कुछ हाथ न आया
बदायूं। स्थानीय प्राधिकारी एमएलसी चुनाव में नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों के सभासदों, ग्राम प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और सांसद विधायक मतदान करते हैं। जिले में कुल 2694 मतदाता हैं। एमएलसी चुनाव, जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव और ब्लॉक प्रमुखी का चुनाव मतदाताओं को एक-दूसरे के खेमे में लाने के लिए भी चर्चा में रहता है। एमएलसी के निर्विरोध निर्वाचन के बाद मतदाताओं को मायूसी हाथ लगी है।
अब तक मैदान में दो प्रत्याशी होने के चलते मतदाताओं को उम्मीद थी कि वह जिसका साथ देंगे उससे कुछ फायदा मिलेगा। अगर दोनों प्रत्याशी मजबूती से लड़ते हैं तो मतदाताओं के भाव भी बढ़ जाएंगे। सोमवार को नामांकन दाखिल किए जाने के बाद से ही भाजपा और सपा दोनों खेमों ने मतदाताओं की घेराबंदी शुरू कर दी थी। मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा था। चर्चा है कि एक प्रत्याशी ने बीडीसी स्तर के कुछ मतदाताओं को साधा भी था। बुधवार को जब सपा प्रत्याशी सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने की खबर फैली तो मतदाताओं में मायूसी दौड़ गई। संवाद
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पर्दें के पीछे से रणनीतिकारों ने कर दिया सपा को चारों खाने चित
बदायूं। भाजपा ने एमएलसी सीट पर पहली बार और वह भी निर्विरोध कब्जा किया। इसके लिए भाजपा के कई रणनीतिकार नामांकन के दिन से पर्दे के पीछे रहते हुए सपा को पटखनी देने में जुट गए। सपा नेता राजनीतिक नब्ज को नहीं भांप सके और नामांकन के तीसरे दिन ही चित हो गए।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता, बिल्सी विधायक हरीश शाक्य, दातागंज विधायक राजीव गुप्ता ने सपा को शिकस्त देने के इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिलाध्यक्ष समेत तीनों नेता दातागंज क्षेत्र के ही निवासी हैं जो सिनोद की कार्यस्थली रही है। इस लिहाज से एकदूसरे को ज्यादा बेहतर ढंग से जानते समझते हैं। इनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा और आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप भी नामांकन वापसी से पहले सपा प्रत्याशी सिनोद शाक्य का पर्चा वापस कराने की रणनीति में जुटे थे। मंगलवार को सिनोद जब बदायूं से लखनऊ गए तब ही कुछ चर्चाएं छन-छन कर बाहर आने लगीं। विधानसभा चुनाव में तीन सीटें हारने के बाद से ही भाजपा ने एमएलसी सीट पर जीत की योजना बना ली थी। जिलाध्यक्ष ने सभी को जिम्मेदारियां बांट दीं। जिला मीडिया प्रभारी आशीष शाक्य ब्लॉकों में लामबंदी कर रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों की रणनीति कामयाब रही और बृहस्पतिवार को नामांकन वापसी से पहले ही सिनोद ने पर्चा वापस ले लिया।
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सिनोद को धोखा दे रही थी सपा
सिनोद शाक्य कुछ ही दिनों में सपा की नीतियों को समझ गए। सपा सिर्फ धोखा देती है। पंचायत चुनाव में भी उनको धोखा दिया गया। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी सिनोद को धोखा मिला। शायद वह भाजपा की नीतियों से प्रभावित हैं। वह समझते हैं कि भाजपा की सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। इसी लिए उन्होंने पर्चा वापस लिया होगा।
-राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
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सिनोद ने ही तोड़ा है भरोसा, सपा ने नहीं
सिनोद शाक्य ने पर्चा वापस लिया है या पार्टी छोड़ी है दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने पर्चा वापस क्यों लिया यह तो वही बता सकते हैं। सपा ने तो उन पर भरोसा जताया था। उन्होंने एक तरह से भरोसा तोड़ने का काम किया है। सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने संबंधी मामले पर मैं किसी तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता। इस बारे में सिनोद ही बेहतर बता सकते हैं।
-प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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दूसरों को धोखा देने वालों को मिला सबक
बदायूं में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की थी। एमएलसी चुनाव में किसी को बलि का बकरा न बनाकर उन्हें खुद चुनाव लड़ना चाहिए था। जिले के इतिहास में पहली बार किसी पार्टी प्रत्याशी ने इस तरह पर्चा वापस लिया है। दूसरों को धोखा देने वालों को आज बेहतरीन धोखा मिला है। बदायूं सपा का गढ़ था। यहां सपा को कमजोर करने के लिए कौन जिम्मेदार है, सब समझ गए हैं। -आबिद रजा, पूर्व शहर विधायक