बदायूं। इस चुनाव में वोट किसे ज्यादा मिला या नहीं मिला, ये दस मार्च को साफ होगा पर यह भी सही है कि नाराज उम्मीदवारों या कार्यकर्ताओं की वजह से दूसरे पक्ष को मजबूती मिली है। जिले की सभी सीटों पर ऐसा माहौल देखने को मिला है।
शहर सीट की बात करें तो भाजपा में ही टिकट के तमाम दावेदार थे। टिकट वितरण से पूर्व तक जनसभाओं और कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे। उनके अलावा सपा और बसपा में भी ऐसा देखने को मिला। सपा के एक नेता ने प्रत्याशी के रूप में वोट मांगना, जनसभाएं करना तक शुरू कर दी थीं लेकिन टिकट वितरण के बाद प्रत्याशियों के नाम सुनकर उनके खेमे में नाराजगी देखने को मिली। सपा कार्यकर्ता के सहयोगी भाजपा का गुणगान करते दिखे तो भाजपा नेता खामोश हो गए। उनके समर्थक सपा की सपोर्ट करते नजर आए। इससे भी सदर सीट पर बड़ा प्रभाव पड़ा। तमाम जगह विरोध हुआ। इसके अलावा दातागंज, बिल्सी, बिसौली और सहसवान सीट पर भी ऐसा माहौल देखने को मिला। यहां भी उम्मीदवारों की लाइन लगी थी लेकिन जब टिकट घोषित हुआ तो संभावितों के अरमानों पर पानी फिर गया। नतीजा ये रहा कि कहीं न कहीं उनकी नाराजगी से पार्टियों को नुकसान जरूर हुआ है। इससे दूसरे पक्ष को मजबूती मिली है। संवाद