बदायूं। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जिले में 14 फरवरी को मतदान होना है। सोमवार को नाम वापसी और चुनाव चिह्न के आवंटन के साथ ही प्रत्याशियों को लेकर स्थिति साफ हो गई। जिले की छह विधानसभा सीटों पर इस बार चुनाव में 61 प्रत्याशी किस्मत आजमाएंगे। 2017 के चुनाव की बात करें तो उस समय 66 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इनमें 44 प्रत्याशी ऐसे रहे जिनसे ज्यादा वोट नोटा ले गया।
2017 के विधानसभा चुनाव में 12550 मतदाताओं को 66 में कोई प्रत्याशी पसंद ही नहीं आया और उन्होंने अपना वोट नोटा (किसी को नहीं) को दिया।
विधानसभा चुनाव 2017 में शहर विधानसभा सीट पर 15 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। इनमें भाजपा के महेश गुप्ता विधायक चुने गए। सपा के आबिद रजा, बसपा के भूपेंद्र सिंह तीसरे और शिवसेना के रामसेवक सिंह पटेल चौथे स्थान पर रहे। पांचवां स्थान नोटा ने लिया। शेष प्रत्याशी नोटा से भी ज्यादा वोट हासिल नहीं कर सके।
बिसौली विधानसभा सीट पर आठ प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई। यहां भाजपा, सपा और बसपा प्रत्याशी ही नोटा से आगे रहे।
सहसवान सीट पर भी आठ प्रत्याशी थे। यहां भाजपा चौथे नंबर पर और नोटा का नंबर पांचवां रहा। सपा के ओमकार सिंह विधायक चुने गए। बसपा के अरशद अली दूसरे और रापद की उमलेश यादव तीसरे स्थान पर रहीं।
विधानसभा चुनाव 2017 में बिल्सी विधानसभा सीट पर नोटा चौथे स्थान पर रहा था। यहां 12 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे थे। आठ प्रत्याशी ऐसे रहे जिनके खातों में नोटा से कम वोट रहे। शेखूपुर सीट पर 10 प्रत्याशियों में भाजपा, सपा और बसपा प्रत्याशी ही नोटा से आगे रहे। यहां से भाजपा के धर्मेंद्र शाक्य विधायक चुने गए। सपा के आशीष यादव दूसरे और बसपा के काजी रिजवान तीसरे स्थान पर रहे।
सबसे ज्यादा 13 प्रत्याशी दातागंज विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में थे। यहां पांचवें स्थान पर नोटा रहा। पहले स्थान पर भाजपा के राजीव कुमार सिंह विधायक चुने गए। दूसरे स्थान पर बसपा के सिनोद शाक्य, तीसरे पर आरएलडी के कैप्टन अर्जुन और चौथे पर कांग्रेस के प्रेमपाल सिंह यादव रहे।
-
विधानसभा 2017 में नोटा पर वोट कुल प्रत्याशी
बदायूं विधानसभा 1509 15
बिसौली विधानसभा 2342 08
सहसवान विधानसभा 2902 08
बिल्सी विधानसभा 1930 12
शेखूपुर विधानसभा 1896 10
दातागंज विधानसभा 1971 13
-
यह है नोटा
ईवीएम में प्रत्याशियों के नाम और उसके सामने चुनाव निशान होता है। मतदाता को जिस प्रत्याशी के पक्ष में वोट देना होता है वह उसी के सामने का बटन दबाता है। इसके साथ ही ईवीएम में एक विकल्प नोटा का भी होता है। नोटा का मतलब है कि इन प्रत्याशियों में मतदाता किसी के पक्ष में वोट देना नहीं चाहता। अगर किसी मतदाता को कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आता तो वह नोटा का बटन दबा सकता है।