उझानी। गंगा किनारे के कटरी इलाके की हरी सब्जियों की आवक शुरू हो गई है। इससे सब्जियों की महंगाई से थोड़ी राहत मिली और देसी गुणवत्ता से रसोई भी महक उठी है। बाजार में लौकी, कद्दू और तोरई आदि की बहार आ गई है।
हरी सब्जियों में पिछले महीना तक खासकर गाजर, अरबी, लौकी, कद्दू, बैंगन, तोरई आदि राजस्थान के अलावा उत्तराखंड समेत हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से आ रही थी। वह सब्जी महंगी थी। इस सप्ताह गंगा किनारे के इलाके और कटरी से कद्दू वर्गीय सब्जियों की आवक ने जायका बढ़ा दिया है। भिंडी, तोरई, कद्दू, करेला, बैंगन और पालक की अगेती फसल का रकबा भी कटरी में सर्वाधिक है। हालांकि गाजर, अरबी और मटर अभी भी राजस्थान से आ रही है। ऐसे में महंगाई की मार थोड़ी कम होगी। सब्जियों के थोक ब्यापारी अमर सिंह ने बताया कि राजस्थान और पहाड़ी इलाकों की सब्जियों की आवक अब ज्यादा दिन तक नजर नहीं आएगी। वह कहते हैं कि दो- तीन सप्ताह में फुटकर की हरेक दुकान पर अपने जिले की सब्जियां नजर आएंगी। जिले की सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर होती है। स्थानीय सब्जियों की आवक में वृद्धि के साथ ही आसपास के राज्यों में भेजने का काम शुरू हो जाएगा।
कद्दू वर्गीय सब्जियों की भरपूर पैदावार
कद्दू वर्गीय सब्जियों के लिए सिंंचाई की आवश्यकता अधिक होती है। कटरी के सब्जी उत्पादकों में गांव अमीरगंज निवासी रामपाल ने बताया कि गंगा का किनारा होने की वजह से लौकी, कद्दू, तोरई, करेला के अलावा ककड़ी, तरबूज, खरबूज और खीरा बहुतायत में होता है। जिले में सहसवान के दहगवां से लेकर उसहैत तक कटरी के अधिकतर किसान सब्जी उत्पादन से जुड़े हैं। इसमें कछला और कादरचौक का इलाका भी है।
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फुटकर बाजार में प्रति किलोग्राम में सब्जियों का भाव
- भिंडी- 60 रुपया
- बैंगन- 20 रुपया
- लौकी- 20 रुपया
- तोरई- 60 रुपया
- करेला- 40 रुपया
- गाजर- 40 रुपया
- हरी मैंथी- 60 रुपया
- कटहल- 50 रुपया
- परमल- 100 रुपया
- अरबी- 60 रुपया
- टमाटर- 20 रुपया
- मटर- 80 रुपया
- फूल गोभी- 30 रुपया
- केला- 40 रुपया
- कद्दू- 10 रुपया
उझानी में फुटकर बाजार में दुकान पर मौजूद सब्जियां। संवाद