उझानी। रेलवे के गुड्स प्लेटफार्म (रैक प्वाइंट) तक का रास्ता गड्ढों में तब्दील हो गया है। करीब तीन साल पहले सड़क टूटनी शुरू हुई और अब लोहे की सरियों का जाल भी ऊपर आ गया है। गड्ढायुक्त सड़कों पर अनाज लदे वाहनों की आवाजाही हो रही है। इस रैक प्वाइंट से सालाना आमदनी करीब 10 करोड़ रुपये की है।
रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार से अढ़ौली फाटक तक रैक प्वाइंट के लिए सड़क का निर्माण करीब चार साल पहले हुआ था। सीसी रोड के लिए लोहे का जाल बिछ़ाया गया था। करीब एक साल तक सड़क चकाचक रही, लेकिन अगले साल से ही गड्ढे होने लगे। गड्ढों में होकर अनाज लदे वाहनों की आवाजाही से कंकरीट उखड़ गई और लोहे की सरियों का जाल भी ऊपर आ गया।
ऐसा ही हाल स्टेशन के मुख्य द्वार का है। मुख्य द्वार के सामने की सड़क पर गहरा गड्ढा हो गया है। रेलवे के अफसरों ने उसे ठीक करवाने की जरूरत महसूस नहीं की। फाटक पार भी सड़क की दुर्दशा है। रैक प्वाइंट से रेलवे की सालाना आमदनी पर 10 करोड़ रुपये है। यहां से पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए मक्का, गेहूं, सरसों और बाजरा की लोडिंग होती है।
चार साल पहले बना था रैक प्वाइंट
- उझानी में रेलवे ने रैक प्वाइंट करीब चार साल पहले बनवाया था। इससे पहले बदायूं स्टेशन पर मालगाड़ियों में लोडिंग और अनलोडिंग हुआ करती थी। चूंकि, बदायूं में रेलवे के पास भूमि का अभाव रहा, इसलिए उझानी के रैक प्वाइंट को विकसित किया गया। इसके बाद से स्थानीय रैक प्वाइंट पर जिले में सप्लाई के लिए राशन का गेहूं- चावल और खाद तो दूसरे राज्यों में भेजने को अनाज लोड किया जाता है।
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अमृत योजना से हो चुका है स्टेशन का कायाकल्प
- रेलवे स्टेशन का कायाकल्प इसी साल जनवरी महीना में पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना से 3.61 करोड़ रुपये की लागत से यात्री सुविधा के अनुरूप जो कार्य कराए गए, उनमें पूरे परिसर का जीर्णोद्धार, पार्किंग स्थल, प्लेटफार्म का उच्चीकरण, आधुनिक शौचालय, निकास और प्रवेश द्वार, यात्री प्रतीक्षालय आदि शामिल है।
- रैक प्वाइंट तक एक ओर नाले के अभाव से सड़क में गड्ढे हो गए हैं। नाला निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव जा चुका है। इसके बाद सड़क का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। रैक प्वाइंट से आमदनी बढ़कर इस वर्ष 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है। - केपी सिंह, वरिष्ठ वाणिज्य अधीक्षक