सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात स्वास्थ्य उपचारिकाओं (एएनएम) के 21 महीना के मेहनताने पर अफसरों ने पलीता लगा दिया है। डिब्बा लादकर गांव और गलियारों में पहुंचकर उन्होंने वैक्सीनेशन में कमी नहीं छोड़ी, लेकिन उनका करीब साढ़े तीन लाख रुपया बकाया है।
स्वास्थ्य उपचारिकाओं के मेहनताने पर पचड़े को लेकर हालांकि बाबू से लेकर चिकित्साधिकारी तक कोई भी कुछ कहने की बजाय एक-दूसरे से बात करने की कहकर टालने में मशगूल हैं। स्वास्थ्य उपचारिकाओं की मानें तो प्रत्येक सत्र में वैक्सीनेशन के कार्य के दौरान उन्हें हर बार ही यही भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही जिला मुख्यालय से धन अवमुक्त कराके मुहैया करा दिया जाएगा। आश्वासन के सहारे अब तक 21 महीना गुजर चुके हैं। यहां तक कि स्पेशल ड्यूटी का भी मेहनताने से भी उन्हें वंचित रखा गया।
बता दें कि सीएचसी से 26 एएनएम जुड़ी हैं। वैक्सीनेशन का प्रत्येक एएनएम को प्रति कार्य दिवस 75 रुपया निर्धारित है। कुल मिलाकर उनका करीब साढ़े तीन लाख रुपया बकाया है। सूत्रों की मानें तो पिछले महीनों एक-दो एएनएम को उनके मेहताने की धनराशि महज इसलिए मुहैया करा दी गई कि उन्होंने खुलकर विरोध शुरू कर दिया था। एक एएनएम ने दबी जुबान बताया कि स्थानीय स्तर से कोई खेल किए जाने की आशंका बनी हुई है। मेहनताने की पत्रावली को लेकर वैक्सीनेशन अनुभाग के लिपिक रामपाल सिंह ने जानकारी होने से इंकार कर दिया। उनकी मानें तो सही जानकारी चिकित्साधीक्षक डॉ. विश्वास अग्रवाल ही बता पाएंगे, लेकिन वह अवकाश पर हैं।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यह जरूर है कि चिकित्साधीक्षक के अवकाश पर होने की वजह से चिकित्सकीय कामकाज वह देख रहे हैं। किसी भी एएनएम ने अभी तक उन्हें ऐसा कुछ भी नहीं बताया है फिर भी सच्चाई का पता करेंगे। - डॉ. वीरेश कुमार, चिकित्साधिकारी।