-85 साल की शांतिदेवी व्हील एंबुलेंस से मतदान करने पहुंचीं
यही जज्बा है जो भारतीय लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है। पैर भले ही आम दिनों में एक कदम चलने की इजाजत नहीं देते, मगर मताधिकार का प्रयोग करने के लिए इनमें भी दम आ गई। एंबुलेंस से मतदान करने पहुंचीं बुजुर्ग शीला नारंग ने भी कांपती अंगुलियों से ईवीएम पर मनचाहा बटन दबा दिया। जैसे ही मशीन से पीं की आवाज आई उनके चेहरे पर खुशी आ गई।
जिले के कई मतदान केंद्रों पर 85 वर्ष या इससे भी ज्यादा उम्र के बुजुर्गों ने वोट डाले। इससे यह साबित हो गया कि लोकतंत्र को जिंदा रखने में अभी भी वे पूरी शिद्दत से सहभागी बने हुए हैं। एक-एक वोट कितना कीमती है यह तो 92 साल की शांति देवी से पूछिए। उन्हें आंखों से सब कुछ धुंधला नजर आता है, चेहरे की गहरी झुर्रियां बतातीं हैं कि आभा कभी नहीं लौटेगी। बूढे़ पैरों और बीमार होने की वजह से वह मतदान केंद्र तक जाने में सक्षम नहीं थीं। सिविल लाइंस की रहने वाली शांति देवी के पति बूटाराम नारंग का निधन हो चुका है। शांति देवी में मतदान का जज्बा था। उन्होंने अपने बेटे से मतदान कराने को कहा। परिवार के लोग उनको लेकर राजकीय इंटर कॉलेज स्थिति मतदान केंद्र एंबुलेंस से लेकर पहुंचे। एंबुलेंस से उतरने के बाद 90 साल की शांति देवी व्हील चेयर से मतदान करने पहुंचीं। मतदान केंद्र के बाहर लगी कतार में वह एक कौतुहल की तरह थीं। एक महिला ने आखिर पूछ ही लिया, अम्मा क्यों आई हो। सभी की नजरें शांति देवी पर थीं। वह ज्यादा नहीं बोल सकीं, लेकिन एक संदेश दिया कि मतदान जरूरी होता है। वोट देने के बाद शांति देवी के चेहरे पर काफी खुशी नजर आई।