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Budaun News: दो मौतों के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, पूरे गांव की स्क्रीनिंग शुरू

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नसीरपुर टप्पा मलसई में जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद - फोटो : 1
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जरीफनगर। नसीरपुर टप्पा मलसई में दो सगे भाइयों की बुखार से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। शुक्रवार को दहगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की टीम ने गांव पहुंच मृतकों के परिवार व आसपास रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। पहले दिन 108 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें छह लोग हेपेटाइटिस-बी और सी से संक्रमित मिले। इसके बाद विभाग ने कैंप लगाकर पूरे गांव की स्क्रीनिंग कराने का निर्णय लिया।
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नसीरपुर टप्पा मलसई में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। पहले दिन जांच में मृतकों के परिवार के तीन सदस्यों समेत कुल छह लोग हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित मिले। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई। अब विभाग यह पता लगाने में जुट गया है कि संक्रमण का स्रोत क्या है।
कहीं यह एक-दूसरे के संपर्क या किसी अन्य कारण से तो नहीं फैला। संक्रमित लोगों का उपचार शुरू कराने की तैयारी की जा रही है, वहीं उनके संपर्क में आए अन्य लोगों की भी जांच होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति में बुखार, पेट दर्द, पीलिया या कमजोरी जैसे लक्षण मिलने पर तत्काल जांच कराई जाएगी।
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जरूरत पड़ने पर रक्त के नमूने लेकर उच्चस्तरीय जांच भी कराई जाएगी। विभाग का दावा है कि जब तक गांव की स्क्रीनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक मेडिकल टीम नियमित रूप से गांव पहुंचकर लोगों की जांच करती रहेगी। साथ ही लोगों को संक्रमण से बचाव और स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

हेपेटाइटिस-बी सीधे लिवर को प्रभावित करने वाला संक्रमण है। समय पर जांच और इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में जो भी हेपेटाइटिस पॉजिटिव मिले हैं, उनका वायरल लोड किया जाएगा। उसकी जांच कराई जाएगी। -डॉ. पीयूष यादव, एमओआईसी


तीन माह से वायरल लोड जांच बंद, शुरू नहीं हो पा रहा हेपेटाइटिस के मरीजों का इलाज
- केजीएमयू की मशीन खराब होने से रुकी है जांच, हर माह 100-150 नए मरीज बढ़ा रहे चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले तीन माह से वायरल लोड जांच पूरी तरह ठप है। इसकी वजह से नए मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। हर महीने 100 से 150 तक नए मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन जरूरी जांच न होने से उन्हें केवल इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है।
जिले में हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों के सैंपल वायरल लोड जांच के लिए लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) भेजे जाते हैं। वायरल लोड रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को एंटी वायरल दवा शुरू करनी है या नहीं। 19 अप्रैल को केजीएमयू ने जिला अस्पताल को पत्र भेजकर मशीन खराब होने की जानकारी दी थी। फिलहाल सैंपल भेजने से मना कर दिया था। तब से जांच बंद पड़ी है।
जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, जिले में करीब एक हजार हेपेटाइटिस मरीजों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा हर महीने 100 से 150 तक नए मरीज भी सामने आ रहे हैं। जांच बंद होने से इन मरीजों का उपचार प्रभावित हो रहा है। कई मरीज बार-बार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ मशीन ठीक होने का इंतजार करने को कहा जा रहा है।
जिला अस्पताल प्रशासन ने केजीएमयू को रिमाइंडर भेजकर जांच दोबारा शुरू कराने का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।


केजीएमयू से मशीन खराब होने का पत्र मिलने के बाद से वायरल लोड जांच के लिए सैंपल नहीं भेजे जा रहे हैं। मशीन शुरू होने की सूचना मिलते ही सैंपल भेजने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाएगी। -डॉ. शिव मोहन कलम, प्रभारी, जिला अस्पताल


क्यों जरूरी है वायरल लोड जांच
हेपेटाइटिस-बी और सी की पुष्टि होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण जांच वायरल लोड की होती है। इससे पता चलता है कि शरीर में वायरस कितनी मात्रा में मौजूद है और लिवर पर उसका कितना असर पड़ रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर एंटी वायरल दवा शुरू करते हैं। यदि जांच समय पर न हो तो इलाज में देरी हो सकती है और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
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