बिल्सी के गांव ओया में घर पर खुशी के माहौल में बैठा जसवीर के परिजन। संवाद
बदायूं। 12 साल तक वादी ने कोर्ट की पैरवी की। 2018 में वादी की मौत हो गई। इसके बाद अपहर्ता जसवीर ने पैरवी की। तब कहीं जाकर सोमवार को 18 साल के बाद दोषियों को सजा मिल सकी। सजा होने के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। पुलिस ने दाेषियों को जेल भेज दिया है।
जसवीर सिंह ने बताया कि उसको पता भी नहीं था कि बदमाश कौन और कहां के थे। पुलिस ने उसको व भाई शेषवीर को गांव के ओमप्रकाश के साथ बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया था। बताया कि बदमाशों ने उसको सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के कुनार गांव के जंगल में एक ईख के खेत में आंखों पर पट्टी और हाथ-पैर बांधकर छह दिन रखा था। पिता मदन पाल की मौत के बाद उसने कोर्ट की पैरवी की। शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार गुप्ता ने उनके केस की पैरवी की, जिसके बाद 12 बदमाशों को सजा मिल सकी है।
फिरौती मांग रहे थे बदमाश
बदमाशों ने तीनों को कुनाल के जंगल में ईख के खेत में हाथ-पैर बांधकर डाल दिया था। वह पिता से लगातार फिरौती की मांग करते आ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने सक्रिया दिखाई। एक बदमाश को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की तो उसकी निशानदेही पर बिल्सी व वजीरगंज दो थानों की पुलिस ने उनको बंधन मुक्त कराया था।