बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बच्ची की मौत के मामले में हुई लापरवाही की जांच चल रही है। प्राचार्य जांच प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उन्हें जांच से दूर रखा गया है। जांच की पूरी कमान सीएमएस संभाल रहीं हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिन में जांच पूरी कर आख्या शासन व प्रशासन को सौंपी जाएगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 23 अक्तूबर को इलाज के अभाव में दस साल की बच्ची ने तड़पकर दम तोड़ दिया था। बच्ची के गले में इंफेक्शन था। वह डेंगू बुखार से पीड़ित थी। परिजन बच्ची को लेकर तीन घंटे तक मेडिकल कॉलेज में इधर-उधर दौड़ते रहे। सब जगह यही बताया गया कि डॉक्टर खेल में व्यस्त हैं। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया, तब कहीं जाकर पुलिस व कॉलेज प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।
पहले तो प्राचार्य घटना से इनकार करते रहे, लेकिन डीएम ने जब मामले में संज्ञान लिया तो प्राचार्य ने इमरजेंसी के डॉक्टर को बचाते हुए ओपीडी के निर्दोष चार डॉक्टरों पर कार्रवाई कर डाली। फर्जी कार्रवाई का मामला जब शासन और प्रशासन तक पहुंचा तो जांच के लिए दूसरी जांच कमेटी बनाई गई है। जांच को 12 दिन से प्राचार्य अटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जांच अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।
यह था मामला
थाना मूसाझाग क्षेत्र के गांव थलिया नगला निवासी नाजिम की बेटी शूफिया (10) को डेंगू बुखार के साथ ही गले में इंफेक्शन हो गया था। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसका उपचार एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत में सुधार न होने के चलते परिजन 23 अक्तूबर की सुबह नौ बजे शुफिया को राजकीय मेडिकल काॅलेज लेकर पहुंचे। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने बच्ची को भर्ती नहीं किया। बच्ची ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था।
जांच तीन दिन में पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद जांच आख्या शासन व प्रशासन काे भेजी जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके बाद ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। -डॉ. अर्सिया मसूद सिद्दीकी, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं