दातागंज। क्षेत्र में एक जीवित महिला ने मृत महिला के नाम से आधार कार्ड बनवा लिया है। मृत महिला के बेटे ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया तो पता चला कि उनका आधार कार्ड बना है। इसके बाद बेटे ने हाईकोर्ट में शरण ली।
तहसील क्षेत्र के ब्लाॅक समरेर के गांव मुगर्रा निवासी ओमकार की पत्नी सुनीता की 1987 में मौत हो चुकी है। उसके बाद ओमकार का संबंध एक विधवा महिला से हो गया। ओमकार के पास 24 बीघा जमीन थी। उन्होंने 12 बीघा जमीन मंदिर के नाम और छह-छह बीघा अपनी पहली पत्नी के पुत्र संजीव और दूसरी पत्नी के नाम वसीयत कर दी।
ओमकार के पुत्र संजीव ने ब्लॉक में अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन सुनीता का आधार कार्ड होने के कारण उसे अपनी मां का प्रमाण नहीं मिल सका। हार कर ओमकार के पुत्र ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट से जब मृत्यु सर्टिफिकेट बनाए जाने के लिए अधिकारियों को आदेश दिए तो जांच की गई। पहली जांच एडीओ पंचायत और नायब तहसीलदार ने की।
दूसरी जांच बीडीओ और तहसीलदार ने खुद की। जांचकर्ता बीडीओ विजय गुप्ता ने बताया कि दूसरी पत्नी खिरिया रत्न गांव की रहने वाली है। अपने पति की मृत्यु के बाद उसने जमीन बेची तो उसमें उसका नाम सरोता लिखा गया है। वहां के प्रधान ने भी इस संबंध में जांच के दौरान बयान दिए हैं। इसी आधार पर उसका आधार कार्ड गलत माना गया है।
पहली पत्नी की मृत्यु पर उसका प्रमाण भी जारी कर दिया गया है। बावजूद इसके अभी भी दूसरी वाली अपने को सुनीता साबित करने में जुटी हुई है। उनका कहना है कि सौतेला बेटा उन्हें मृत साबित करने के लिए प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर रहा है।