ककोड़ा मेला (बदायूं)। रुहेलखंड में मिनी कुंभ के नाम से मशहूर ककोड़ा मेले में बृहस्पतिवार देर शाम को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मेला पूरी तरह से गुलजार हो गया। गंगाघाट हर-हर गंगे के जयकारों से गूंज उठा। मुख्य स्नान शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर होगा। मेले में मीना बाजार, बर्तन, लकड़ी के खिलौने व सामान आदि का बाजार सज चुका है। इसके अलावा झूले व मौत का कुआं भी लग गया है। कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर मेले में जबरदस्त रौनक दिखी। दूरदराज जिलों से आए लोगों ने मेले में तंबू लगाकर गंगा किनारे अपना ठिकाना बनाया। जिला पंचायत की तरफ से तो करीब 655 रावटियां बनाई गईं। काफी संख्या में लोग ट्रैक्टर ट्राॅली में अपने घरेलू सामान लेकर पहुंचे। यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां गंगा की रेत पर तंबुओं का शहर बस गया है।
खाना बनाने के लिए श्रद्धालु छोटा सिलिंडर व चूल्हा साथ लेकर आए हैं। वहीं कई श्रद्धालु चूल्हा लाए हैं। यहां चूल्हे बिक भी रहे हैं। जिसे खरीदकर लोग चाय, खिचड़ी आदि बना रहे हैं।
मेले में मीना बाजार, लकड़ी का फर्नीचर, सिलबट्टा, मिठाई की दुकानें, चाय नाश्ते के लिए होटल, बच्चों के खिलौने, रजाई गद्दों की दुकानों के साथ ही झूले भी लग गए हैं। मेले में लगे इन बाजार में देर रात तक रौनक रही। लोग खरीदारी करते रहे।
मेले में हुई पतंगबाजी
लोग मेले का आनंद लेने के लिए पतंग व मांझा भी साथ ले आ हैं। गंगा किनारे लोगों ने खाली जगह पर जाकर पतंग उड़ाई। पेंच लड़ाए। गंगा किनारे पतंग उड़ाने का अलग ही मजा है। इसके अलावा लोग यहां वॉलीबाॅल खेलते नजर आए।
श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी
मुख्य स्नान वाले दिन मुख्य घाट तक गंगा की बहती धार पहुंचेगी या नहीं इसको लेकर काफी ज्यादा असमंजस था। अमर उजाला ने इस ओर प्रशासन का ध्यान केंद्रित किया। जिस पर डीएम निधि श्रीवास्तव ने नरौरा, बिजनौर और हरिद्वार के लिए गंगा स्नान को लेकर 18,000 क्यूसेक पानी कछला में बनाए रखने के लिए पत्राचार किया था। इसके साथ ही पूर्व में बंद हुई बहती धार को दोबारा शुरू कराने का प्रयास किया। प्रयास सफल रहा है। बृहस्पतिवार को दिन भर गंगा में खूब पानी आया। श्रद्धालु इसमें स्नान कर काफी खुश नजर आए।
गंगा की कराई जा रही बेरिकेडिंग
स्नान के दौरान कोई हादसा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए जिला पंचायत की ओर से गंगा की बेरिकेडिंग कराई जा रही है। वहीं पुलिस-पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। जो नाव से लगातार नजर रखेंगे। साथ गोताखोंरों को भी गंगाघाट पर कुछ-कुछ दूरी पर तैनात किया गया है। जो लोगों को सतर्क करते रहेंगे।
गंगा मइया की उतारी महाआरती
कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर मेला ककोड़ा में गंगा मइया की महाआरती उतारी गई। महाआरती में हजारों श्रद्धालु उमड़े और देर तक तालियां बजाकर झूमते रहे। इससे माहौल भक्तिमय हो गया। इससे पहले मेले में हवन पूजन किया गया।
बृज के कलाकारों ने बांधा समा
जिला पंचायत की ओर से मेला परिसर में श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए जो इंतजाम कराए गए हैं। उनमें बृज के कलाकारों ने अपनी पेशकश से समा बांध दिया। दर्शकों ने कठपुतली का नाच भी देखा। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। बृज की मंडली के कलाकारों ने रासलीला का मंचन किया। श्रीकृष्ण जन्म से लेकर रास रचने की लीला के दौरान कलाकारों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा।
मेले में शुरू हुए भंडारे
श्रद्धालुओं की सेवाभाव के लिए पूर्णिमा से एक दिन पहले मेले में भंडारे शुरू हो गए। कई श्रद्धालुओं ने मेले में भंडारा कर प्रसाद का वितरण किया। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को भी खाने-पीने के लिए कोई दिक्कत नहीं हुई। बता दें कि सैकड़ों लोग यहां मेले में भंडारा कराकर पुण्य कमाते हैं।
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद
मेला ककोड़ा में वॉच टावर से निगरानी करता पुलिस कर्मी। संवाद