यदि आप मार्केंट में खुले में बिकने वाली चीजें खाते हैं तो सावधान हो जाइए। ये वस्तुएं आपकी सेहत के लिए घातक हो सकती हैं। शहर में जगह-जगह कटे फल और खाने-पीने की चीजें खुली रखकर बेची जाती हैं। खुली रखी होने से इन वस्तुओं पर मक्खी-मच्छर बैठते हैं, जो बीमारियों की जड़ हैं। दूषित फल या दूसरी चीजें खाने पर आपकी सेहत का कबाड़ा हो सकता है।
सर्दियों की अपेक्षा गर्मी के मौसम में संक्रामक रोग ज्यादा फैलते हैं। देखने में आता है कि फल विक्रेता फलों को काटकर ठेलों पर रख लेते हैं। कटे हुए फल घंटों नंगे रखे रहते हैं और उन पर मक्खियां छाई रहती हैं। फलों को न तो सुरक्षित तरीके से काटा जाता है और न ही उन्हें धोया जाता है। ऐसे ही शहर के अंदर हर तिराहे-चौराहे पर चाट पकौड़ी के ठेले लगे रहते हैं। दुकानों पर समोसे भी बिकते हैं, पर शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती। ज्यादातर खाद्य पदार्थ तड़के यहां फिर रात में ही तैयार कर लिए जाते हैं। परिणामस्वरूप गर्मी में यह जल्द ही खराब हो जाते हैं। इनको खाने पर रिजल्ट बीमारियों के रूप में सामने आता है। यह भी देखा जाता है कि जिन स्थानों पर यह खाद्य पदार्थ बिकते हैं वहां दुकानदार इस बात की परवाह नहीं करते कि पास में नाली और वहां गंदगी में मक्खी-मच्छर पनप रहे हैं। वह बिना किसी परवाह के लोगों को बीमारी बेचते हैं।
क्या कहते हैं फल विक्रेता
फल विक्रेता किशन का कहना हैं कि वह किसी भी फल को बेचते समय ही काटते हैं। वह जानते हैं कि कटे और सड़े फल खाने से बीमारियां होतीं हैं इसके लिए वह पूरी सावधानी बरतते हैं।
निजी बस स्टैंड के फल बेचने वाले राजाराम ने कहा कि वह अच्छे फल ही मंडी से लाते हैं। सड़े फल को वह भी बेचना गंवारा नहीं समझते।
यहां ज्यादा बिकती हैं खुली चीजें
कटे फल और खाने की चीजें समूचे शहर में खुली बिकती हैं। मगर कचहरी के आसपास, इंद्राचौक, रोडवेज, प्राइवेट बस स्टैंड, पुलिस लाइन, ओवरब्रिज आदि स्थानों पर दुकानों की संख्या ज्यादा है।
अपने सामने कटवाएं फल
लोगों को चाहिए कि वह कटे फलों की खरीदारी करने से बचें। जितना संभव हो अपने सामने ही फलों को कटवाए। इससे आप दूषित फल खाने से बच जाएंगे।
- शिशांक तिवारी
कभी नहीं लेते कटे फल
कटे हुए फलों से हमेशा परहेज है। ताकि बीमारी से बचा जा सके। -असलम