बदायूं। यहां स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज को एमसीआई की मान्यता जल्द मिलने की उम्मीद है। शासन ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। बुधवार को लखनऊ से यहां पहुंची जांच टीम ने पूरे दिन मेडिकल कॉलेज में रहकर गहनता से छानबीन की। मेडिकल कॉलेज में मिली कमियों और गंदगी पर टीम ने कड़ी नाराजगी जताई। जांच टीम अपनी रिपोर्ट प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को देगी। शासन से जांच रिपोर्ट एमसीआई को भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमसीआई की टीम यहां आकर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करेगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज को एमसीआई की मान्यता मिल जाएगी।
प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की ओर से गठित चार सदस्यीय टीम बुधवार सुबह यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंची। इसमें डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट के कार्डियोलाजी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. मुकुल मिश्रा के नेतृत्व में डॉ. मनीष, डॉ. ब्रिजेश कुमार, डॉ. संतोष पांडे ने कॉलेज का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों की संख्या के बारे में सबसे पहले जानकारी हासिल की। इसके बाद कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया। उन्हें कुछ निर्माणाधीन जगहों पर जलभराव दिखाई दिया। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। वहीं एक कक्ष के बाहर विकलांग वार्ड का बोर्ड लगा था। इसे तुरंत बदलकर दिव्यांग लिखने का निर्देश दिया। जब वह रूम नंबर 41 पर पहुंचे। ताला लटका था। काफी इंतजार के बाद भी ताला नहीं खुल सका। इसके चलते उस रूम का निरीक्षण नहीं कर पाए। वहीं कुछ मरीजों ने डॉक्टरों पर बाहर से दवा लिखने का आरोप लगाया।
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निरीक्षण के दौरान जब टीम आई रूम पहुंची। तो वहां पर तैनात डॉक्टर पियूष ने टीम को बताया कि यहां पर मरीजों की आंखों का चेकअप करते हैं। इसके बाद में जिला अस्पताल में उन को रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि अभी राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल से अटैच है। वहां पर जाकर इन मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है। साथ ही डॉक्टर ने बताया कि वहां पर कुछ मशीनों की कमी है।
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शासन की ओर से जांच टीम आई है। टीम ने कॉलेज का गहनता से निरीक्षण किया है। इस दौरान कुछ कमियां मिली हैं, जिनकी लिस्ट तैयार की गई। यह लिस्ट शासन को दी जाएगी, जिससे कमियों को जल्द दूरा किया जा सके।
- डॉ. एनसी प्रजापती, प्रिंसिपल राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं