नगरिया खनू के करन सिंह ने बताया कि गांव किनारे पानी पहुंचा है। खेतों की फसल बर्बाद हो गई। रामगंगा भू-कटान तेजी से कर रही है और पानी बढ़ी तो कुछ नहीं बचेगा। पशुओं के चारे की सबसे बड़ी समस्या है। पशुओं का चारा रामगंगा में समा गया। वहीं, नगरिया खनू के पास के लोगों ने बताया कि रामगंगा के पानी से चार मकान भी घिर गए हैं। यहां झाला है। उसमें पप्पू, नत्थू, श्यामलाल आदि रहते हैं। बीस गाय भी फंसी हैं, जिनके लिए चारे का संकट गहरा गया है।
बाढ़ में फंसे दर्जनों गोवंश
दातागंज क्षेत्र में नगरिया खनू के आसपास बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में बड़ी संख्या में गोवंश फंसे हुए हैं। एक स्थान टीले पर पशुओं ने डेरा जमाया है। यह स्थान रामगंगा नदी के पानी से चारों ओर घिरा हुआ है।
खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर बह रही गंगा
उसहैत इलाके में बुधवार को गंगा नदी का जलस्तर कछला पुल पर नापा गया तो वाटर लेवल गेज में जलस्तर 162.58 गेज मीटर आया। गंगा अभी भी खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इस वजह से रैपुरा व कदमनगला में कटान जारी है।
बाढ़ पीड़ितों को मिली राहत
ग्रामीणों ने बताया कि रैपुरा में बाढ़ खंड की टीम कटान रोकने की तैयारियां कर रही हैं, लेकिन खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। आबादी का इलाका कटान से 50 मीटर तक दूर है, ऐसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो कच्चे पक्के मकानों को भी नुकसान हो सकता है। कदमनगला गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए बना बाढ़ राहत शिविर में सुविधाएं मिलनी शुरू हो गईं हैं। ग्रामीणों के रुकने के लिए और खाने के लिए भोजन मिल रहा है। पशुओं के लिए चारा और भूसा भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कदमनगला में तीन लोगों को उनके मकान का मुआवजा मिल चुका है। अन्य 20 लोगों के दस्तावेज पूरे कर आगे बढ़ाए गए हैं।
रफतपुर को जाने वाली मार्ग पर 1.5 फीट तक पानी भरा हुआ है, जो सड़क से होते हुए खेतों की ओर बह रहा है। गांव तक पानी नहीं आया है, लेकिन खेतों में फसल की बर्बादी हुई है। भुनडी गांव में तटबंध के पास हो रहा कटान बंद होने से बाढ़ खंड और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लगभग 500 बीघा खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। बाढ़ खंड के कर्मी लगातार इलाके में निगरानी कर रहे हैं।
एसडीएम दातागंज विनोद कुमार ने बताया कि दातागंज क्षेत्र में जिन गांवों के किनारे गंगा और रामगंगा का पानी पहुंचा है वहां निगरानी कराई जा रही है। कदमनगला के लोगों के लिए राहत शिविर में भोजन की व्यवस्था भी कराई गई है। जिन मार्गों पर पानी आया है वहां आवागमन के लिए वोट और नाव लगाई गई हैं।