शिक्षा बिन सब अधूरा है। शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जिससे हर कोई अच्छे-बुरे के बारे में जान सकता है। शिक्षा से ही माता-पिता या फिर ससुराल वालों का नाम रोशन किया जा सकता है। शिक्षा का जुनून था जो भांवरें पड़ने के बाद अलका वर्मा ससुराल न जाकर शादी के लाल जोड़े में स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा देने सीधे आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय पहुंच गई।
थाना मूसाझाग क्षेत्र के गांव बेला गुलड़िया निवासी सुधीर कुमार वर्मा एक साधारण किसान हैं। उनकी बेटी अलका वर्मा की बारात सोमवार की रात बरेली जिले के आंवला थाना क्षेत्र के गांव दराबनगर से आई थी। सुधीर वर्मा के पांच बेटियां और एक बेटा हैं, उनका सपना बेटियों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा देने का है। इसके पीछे उनका मानना है कि बेटियां भी किसी भी लिहाज से बेटों से कम नहीं होती हैं। जरूरत होती है उन्हें अच्छी परवरिश की सो वह बेटियों पर पूरा ध्यान देते हैं।
अलका वर्मा इस साल स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे रही है। सोमवार को वह पूरी रात जगी। भांवरें पड़ीं, उसे मंगलवार को होने वाले पेपर की भी चिंता थी। सो वह शादी के जोड़े में भांवरे पड़ने के बाद मंगलवार को पेपर देने कॉलेज पहुंच गई। शादी के जोड़े में देखकर शिक्षिकाओं और उसकी सहेलियों ने शादी की बधाई दी। इस बात के लिए सेल्यूट भी किया कि अलका ने विदाई के बजाय शिक्षा को सबसे ज्यादा वरीयता दी। अलका ने पेपर भी इस तरह दिया जैसे शादी का उसकी तैयारी पर कोई असर नहीं पड़ा हो। बाद में उसने कहा कि पेपर अच्छा हुआ है। उसका कहना था कि वक्त के साथ हर काम भी जरूरी है। अलका ने कहा कि वह ससुराल में पहुंचकर भी आगे की पढ़ाई जारी रखेगी, ताकि उनके माता-पिता के साथ ही जीवनसाथी का भी सपना पूरा हो सके।