शिक्षक की अपहरण के बाद हत्या किए जाने की घटना में मुजरिम रहे दो सगे भाइयों समेत तीन को स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार सप्तम ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी पर 20-20 हजार का जुर्माना भी लगाया है,जबकि एक आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
संभल जिले के थाना गुन्नौर क्षेत्र के गांव शाहपुर निवासी वीरेंद्र सिंह ने दो अगस्त 05 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उनके भाई नरवीर सिंह प्राथमिक विद्यालय जाफरपुर में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। 30 जुलाई 05 तो कुछ लोग नरवीर सिंह को रुपये देने के बहाने से बुलाकर ले गए थे। उन्हें जाते समय जाफरपुर के कई लोगों ने देखा था। बाद में वे लोग नरवीर को थाना सहसवान क्षेत्र के गांव कौल्हाई ले गए। नरवीर को उन्हीं के गांव के कुछ लोगों ने कौल्हाई में भी देखा था।
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब उनके भाई उस दिन घर नहीं लौटे तो हर संभावित स्थान पर तलाश किया, लेकिन कोई पता नहीं चला। वीरेंद्र ने भाई को गायब कर देने के मामले में गांव के ही ओमपाल, उमेश, भगवान स्वरूप पुत्रगण विद्याराम और मनोहर पुत्र छलेंद्र को नामजद किया था। वह आरोपियों के घर गया तो वह गायब थे। दो अगस्त को पुलिस ने उमेश को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर नरवीर सिंह की लाश वजीरगंज-बिल्सी रोड पर सोत नदी के पास बरामद हुई।
स्पेशल जज अशोक कुमार सप्तम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद मुजरिम उमेश, ओमपाल और मनोहर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर 20-20 हजार का अर्थदंड भी लगाया। वहीं तीसरे भाई भगवान स्वरूप को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।