डीएम दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर एडीएम प्रशासन अजय कुमार श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार सिंह ने बुधवार को जिला अस्पताल में अचानक छापा मारा। निरीक्षण के दौरान 11 डॉक्टर गायब मिले। इनमें चार डॉक्टर कई महीने से ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे। इस पर एडीएम ने संबंधित बाबू से डॉक्टरों का वेतन रजिस्टर मांगा, मगर बाबू पूरा डाटा नहीं दे सका।
बुधवार दोपहर करीब एक बजे एडीएम प्रशासन और सिटी मजिस्ट्रेट अचानक जिला अस्पताल जा पहुंचे। जहां उन्होंने प्रभारी सीएमएस डॉ. शिव कुमार अग्रवाल के साथ सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी का निरीक्षण किया। उस वक्त डॉ. एमएस सिद्दीकी, डॉ. कप्तान सिंह, डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. अवशेष कुमार, डॉ. नताश ग्रेवल, डॉ. नितिन कुमार, डॉ. ऋषिम अग्रवाल अनुपस्थित मिले। इसके बाद एडीएम, सीएमएस कार्यालय में गए। वहां देखा तो इमरजेंसी का सीसी टीवी कैमरा नहीं चल रहा था। एडीएम के पूछने पर पता चला कि अस्पताल में बायोमैट्रिक मशीन लगी है, लेकिन अधिकतर डॉक्टर अपनी उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज करते हैं। वेतन बाबू मुकेश से पूछताछ की तो वह केवल छह डॉक्टरों के वेतन की फाइल दिखा सका। इस पर एडीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए बाबू को संबंधित सभी फाइलों के साथ तलब किया।
बाबू ने लगाए एक दूसरे पर आरोप
निरीक्षण के दौरान जब डॉक्टर से वेतन संबंधी फाइल मांगी, तो बाबू मुकेश व बाबू लईक में आपस में कहासुनी होने लगी। दोनों एक दूसरे पर पटल देखने की बात कहने लगे। एक बाबू ने शासनादेश का हवाला दिया, तो दूसरे ने चार्ज नहीं मिलने की बात कही।