जिले में गंगा और रामगंगा से बाढ़ का खतरा रहा है। हालांकि वर्ष 2010 के बाद ऐसी कोई बाढ़ नहीं आई है, जिसने इन नदियों के किनारे बसे गांवों में तबाही मचाई हो। गंगा के इस और बसे गांवों में से करीब डेढ़ दर्जन गांव कासगंज जिले के हैं। जो बाढ़ प्रभावित रहते हैं। बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से बदायूं जिले को ही इनकी देखरेख करनी होती है। कासगंज प्रशासन की मांग पर बाढ़ खंड बदायूं ने यहां 13 किमी नए बांध के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था, जो पास हो चुका है लेकिन धन उपलब्ध न होने से इसके ऊपर से बाढ़ का खतरा नहीं टला है।
गंगा और रामगंगा के दोयाब में बसे बदायूं जिले में बाढ़ भारी तबाही मचा चुकी है। गर्मियों में ही बाढ़ बचाव के संसाधन जुटाए जाते हैं और निर्माण कार्य कराए जाते हैं। इस बार भी निर्माण कराए जाने थे लेकिन प्रमुख कार्यों को भी धन नहीं मिला है। बरसात का सीजन शुरू हो गया तो निर्माण कार्य मुश्किल हो जाएंगे। गंगा की बाढ़ से अन्य कहीं इतना खतरा नहीं है, जितना कादरचौक क्षेत्र में कासगंज जिला के इस पार के इन करीब डेढ़ दर्जन गांवों को है।
कादरचौक क्षेत्र की गंगा को बाढ़ के चढ़ाव से रोकने को कई बार प्रशासनिक स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। बाढ़ खंड विभाग सचेत करता रहा है कि गंाव मुनता नगला से सरैली के बीच बांध न होने के कारण गंगा का पानी कासगंज जिले के गांवों को अपनी चपेट में ले लेता है। वैसे तो जिले के बांधों में अब तक छह लाख क्यूसेक पानी झेलने की क्षमता का आभास करा दिया है, लेकिन तीन क्यूसेक से ऊपर गंगा का पानी बढ़ा तो कासगंज के इन गांवों में पानी भर जाना लाजिमी है। इसका कारण है दो बांधों के बीच में इस इलाके में गंगा की बाढ़ रोक को कोई संसाधन नहीं है।
गंगा के फैलाव को बना है रास्ता
जिले मेें 78 किमी लंबे विभिन्न बांधों से गंगा के प्रवाह को बांधा गया है। कादरचौक क्षेत्र में एक ओर पथरामई बांध है तो दूसरी ओर जमीदाराना बांध है। दोनो बांधों के बीच में मुनता नगला से सरेली तक खुली जगह है। गंगा जब भी बाढ़ पर होती है, तो इधर से ही प्रवेश कर लेती है और विशेष कर कासगंज जिला के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों को प्रभावित कर डालती है। कासगंज प्रशासन के आग्रह पर बदायूं बाढ़ खंड ने इसके बीच 13 किमी बांध के निर्माण का प्रस्ताव भेजा, जिसे मंजूर कर लिया गया है। नावार्ड इसे धनराशि प्रदान करेगा। स्वीकृति के बाद अभी भी धनराशि न मिल पाने के कारण इस सीजन में बांध का काम शुरू हो पाना मुश्किल होगा।
22 करोड़ की हो चुकी है बांध को स्वीकृति
बदायूं। कासगंज प्रशासन की पहल और स्थानीय जिला प्रशासन के निर्देश पर बदायूं बाढ़ ने मुनता नगला-सरैली 13 किमी बांध का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। इसके लिए नावार्ड की ओर से 22 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन यह धनराशि इस बार बाढ़ आने से पहले नहीं मिल सकी। अब इतना समय नहीं है कि बाढ़ के सीजन में काम पूरा हो सके। इसलिए इस बाढ़ में इनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहेगी।
कासगंज के ये गांव होते हैं बाढ़ से प्रभावित
1. मुनता नगला, 2. सरैली, 3. ओम नगरिया, 4. तिलक नगला, 5. खुड़ा भाट, 6. हाफिज गंज, 7. डंबर नगला, 8. बकरी नगला, 9. वन सोती, 10. जिजौल, 11. बहेड़ा, 12. टिकाई, 13. फतेह नगला आदि।
मुनता नगला और सरैली के बीच 13 किमी का बांध स्वीकृत है। धनराशि प्राप्त होने के बाद काम शुरू कराया जा सकता है। धन प्राप्ति के लि नावार्ड से लगातार संपर्क भी रखा गया है। जिला प्रशासन और शासन को भी स्थितियों से अवगत कराया जा चुका है।
- डीके जैन, एक्सईएन, बाढ़ खंड