सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में मंगलवार सुबह हुई बारिश की वजह से फरियादियों की संख्या काफी कम रही। अधीनस्थ अफसरों को खाली बैठे देख डीएम दिनेश कुमार सिंह ने औचक निरीक्षण की योजना बनाकर दो टीमें गठित कीं। सीडीओ के नेतृत्व वाली टीम को जिला अस्पताल और जिला कृषि अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम को राजकीय इंटर कॉलेज भेजा।
सीडीओ संदीप कुमार ने जिला दिव्यांजन सशक्तीकरण अधिकारी संतोष कुमार और एसडीएम पारसनाथ मौर्य के साथ जिला अस्पताल में छापा मारने पर सबसे पहले सीएमएस कक्ष देखा। इसके बाद इमरजेंसी वार्ड गए, वहां लगा सीसी टीवी कैमरा बंद था। इमरजेंसी में दो मरीज सीमेंट की स्लैब पर लेटे थे। कक्ष के बाहर उपलब्ध दवाइयों की उपलब्धता वाली सूची नहीं लगी थी। इमरजेंसी वार्ड में 17 बेड पर मरीज भर्ती थे। इनमें अधिकतर बेड और चादर गंदी थीं। उपस्थिति पंजिका देखने पर 31 डॉक्टरों के नाम दर्ज थे। इनमें से आठ डॉक्टर नदारद मिले, हालांकि बाद में दो डॉक्टर पहुंच गए। आयुष डॉक्टर मनोज कुमार राठौर समेत 15 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। वहीं अस्पताल परिसर में वाहन इधर-उधर खड़े थे, जिससे लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही थी।
नहीं मिली एंटी रैबीज वैक्सीन
जिला अस्पताल में कुत्ते कटाने के रोज 30 से 40 मरीज पहुंचते हैं। मगर अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है। इससे मरीजों को बैरंग लौटा दिया जाता है। वैक्सीन के लिए पत्राचार करने के लिए कहा गया है।
जनरल सर्जिकल वार्ड में टूटा पड़ा था बैड
-निरीक्षण के समय सीडीओ को पुरुष सर्जिकल वार्ड खाली मिला। मगर सर्जिकल महिला वार्ड में पुरुष मरीज भर्ती थे। पुरुष वार्ड में बेड टूटा पड़ा था।
शौचालयों की स्थिति बदत्तर
निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में बने पुरुष और महिला शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली। देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कई महीने से इसकी सफाई नहीं हुई है। दोनों ही शौचालयों में पानी नहीं आ रहा था।