कर्ज में डूबे किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, लेकिन उसके कर्ज का निर्णय नहीं हो सका और न ही बैंक प्रबंधन से लेकर जिला प्रशासन ने कोई आश्वासन दिया। ऐसे में परिवार वालों की सांसें और अटक गई हैं। लोग अनुमान लगा रहे हैं कि एक तो परिवार पहले से पीड़ित है। दूसरी ओर उसका कर्जा ज्यों के त्यों बना हुआ है। इन हालात से परिवार वाले अनुमान लगा रहे हैं कि अब उनका कर्जा माफ नहीं होगा। इसका भुगतान उन्हें ही करना पड़ेगा।
थाना क्षेत्र के ग्राम बर्खिन निवासी 70 वर्षीय नत्थू ने बुधवार रात किसी समय गांव से बाहर एक पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसका पता परिवार वालों को गुरुवार सुबह चला था। रास्ते से गुजर रहे लोगों ने नत्थू के शव को फंदे पर लटका देखा। उसके बाद उन्होंने परिवार वालों को सूचना दी थी। जिस पर पहुंचे परिवार वाले शव को उतार कर घर ले गए और देर शाम को उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया। इस संबंध में परिवार वालों ने पुलिस को भी सूचना नहीं दी लेकिन वृद्ध के आत्महत्या करने का जो कारण निकलकर सामने आया, वह बैंक का 56935 रुपये कर्ज था। किसान ने वर्ष 2016 में पंजाब नेशनल बैंक से 48 हजार रुपये कर्ज लिए थे। किसान को अनुमान था कि प्रदेश सरकार की ऋण मोचन योजना में माफ हो जाएगा। इसलिए किसान ने यूपी किसान कर्ज राहत पोर्टल पर शिकायत की थी। परंतु बैंक वाले किसी तरह मानने को तैयार नहीं थे। वैसे भी नत्थू गरीबी हालत में जैसे-तैसे अपनी जीवन गुजार रहा था। दूसरा बैंक का कर्जा उसके लिए अभिशाप बन गया था। जब किसान को कर्ज माफी का कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया तो, उसने फंदा लगाकर जान दे दी।
इस घटना को हुए 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है परंतु शुक्रवार शाम तक कोई अधिकारी या कर्मचारी पीड़ित परिवार का हाल जानने नहीं पहुंचा। शाम तक परिवार वाले अनुमान लगाते रहे कि शायद कोई उनकी जरूर सुनेगा लेकिन उनका अनुमान बेकार साबित हुआ। दोपहर के समय सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता गांव पहुंचे और उन्होंने किसान के परिवार वालों से मुलाकात की। विधायक ने परिजनों को ढाढ़स बंधाया।