इस्लामनगर। नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े स्तर के घोटाले की आशंका जताई गई है। दो साल में 1028 से अधिक आवास स्वीकृत किए गए, इसमें से महज तीन सौ आवासों को सही बताया जा रहा है। 728 में फर्जीवाड़े किए जाने की आशंका है। मामले में 18 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला होने की आशंका जताई गई है।
बिल्सी तहसील प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश पर महज 134 आवासों की जांच कर 32 अपात्र निकाले हैं, जिनसे अब विभाग रिकवरी की तैयारी कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पहले ध्यान दिया जाता तो सरकारी पैसे का बंदरबांट नहीं होता और पात्रों को ही लाभ मिलता। बीते दो साल में इस योजना में 1028 आवास स्वीकृत हुए हैं। शिकायतकर्ताओं ने शुरू से ही पात्रता पर सवाल उठाए थे।
आवाज दबने पर उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा। कस्बे वासियों का आरोप है कि इन 1028 में से मात्र 300 ही पात्र हैं। एक आवास पर 2.50 लाख रुपये मिलते हैं। चर्चा यहां तक है कि बड़े व्यापारियों, आयकर दाता, जीएसटी धारक, प्रॉपर्टी डीलर, भट्टा स्वामी, आढ़तियों को भी लाभ दिया गया, जो आलीशान घरों के मालिक हैं।
लाभार्थियों से तीस हजार रुपये तक वसूली करने का आरोप है। जांच में ऐसे लोग पात्र मिले हैं, जिनके पिता या पत्नी पेंशन पा रहे हैं। एक ही घर में तीन-तीन सगे भाई-बहनों और पत्नियों को भी आवास देने का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि आयकर दाता और जीएसटी धारकों ने भी योजना का लाभ लिया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पति के नाम से भी आवास लेने की बात सामने आई है। सभासद अपने-अपने वार्ड के लाभार्थियों के फॉर्म खुद ही पास कराते रहे। लोगों का आरोप है कि आवास पास होने से पहले और खाते में पैसा आने के बाद मोटी रकम वसूल की जाती है। कस्बा वासियों का कहना है कि अगर सही जांच हुई तो लेखपाल, कानूनगो से लेकर कई बड़े अधिकारियों की गर्दन फंसना तय है।
फोटो-50 नंबर
इन पात्रों को नहीं मिला आवास का लाभ
वंचित मोहल्ला कुम्हरान निवासी श्यामोली घरों में सफाई और बर्तन मांजकर बीमार पति और चार बच्चों का पालन करती हैं। थोड़ी जगह में टूटी कड़ियों की छत और त्रिपाल के नीचे परिवार रहता है। तीन बार आवेदन किया, लाभ नहीं मिला।
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मोहल्ला कुम्हारन की ही सुनीता के पति भट्टे पर मजदूरी करते थे। 50 साल पुराना मकान है, बारिश में पूरा परिवार त्रिपाल के नीचे रात गुजारता है। चार बार आवेदन किया, नाम सूची में नहीं। जिम्मेदारों ने इनके नाम सूची में शामिल नहीं किए।
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फोटो- 53 नंबर
मोहल्ला नई बस्ती निवासी समीर बीमारी से दिव्यांग हैं। छत न होने से पत्नी छोड़ गई। भाई-बहन के सहारे जीवन गुजार रहे हैं। 100 गज का प्लॉट खाली पड़ा है। नगर पंचायत और जिलाधिकारी से शिकायत के बाद भी लाभ नहीं मिला।
अपात्रों को नोटिस देने का अधिकार डूडा को : एसडीएम
एसडीएम बिल्सी गौरव आर्य ने बताया कि उक्त प्रकरण में हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले से संबंधित प्रक्रिया में डूडा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में नोटिस जारी करने का अधिकार डूडा विभाग को ही है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देश प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सुनीता अपने पति के साथ।
सुनीता अपने पति के साथ।
सुनीता अपने पति के साथ।
सुनीता अपने पति के साथ।