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सड़कों पर फेंका जा रहा वायो मेडिकल कचरा

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सड़कों पर फेंका जा रहा मेडिकल कचरा
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बदायूं। सड़कों पर फेंका जाने वाला बायो मेडिकल वेस्ट पर्यावरण के लिए खतरा बना हुआ है। इससे लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है।
स्वास्थ्य विभाग बड़े-बड़े दावे करता है। लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी भरता है लेकिन विभागीय अधिकारियों की आंखें तभी खुलती हैं, जब कहीं मामला बिगड़ जाता है। विभाग कितना सक्रिय है, यह तो पिछले समय जिले में फैले बुखार के दौरान ही पता चल गया था। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद आज शहर की सड़कों पर बायो मेडिकल वेस्ट (कचरा) नहीं फेंका जाता। शहर में ऐसे कई इलाके हैं, जहां सड़कों पर बायो मेडिकल कचरा फेंका जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह गलत है और इसके लिए नियम भी हैं। ऐसे कचरे को खुले में सड़क पर यूं ही नहीं फेंका जा सकता। भारत सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार यह लोगों की मौत का सामान है। ऐसे कचरे से बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा संकट है।
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मेडिकल कचरा खा गई गाय, मरणासन्न
शहर में सड़क किनारे डाला जा रहा बायो मेडिकल कचरा जानवरों के लिए जानलेवा बन गया है। कुछ दिन पहले बीएसए कार्यालय के नजदीक गली में घूम रही गाय ने सड़क पर पड़ा बायो मेडिकल कचरा खा लिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक उस कचरे में संक्रमित सुइयां भी थीं, जो गाय के गले में अटक गईं। इससे वह वहीं गिर गई और फिर नहीं उठ सकी। देर रात तक बेहोश पड़ी रही तो लोगों ने उस पर गौर किया। बाद में पता चला कि गाय ने बायो मेडिकल कचरे को निवाला बनाया था। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। इससे मौके पर दर्जनों लोग जमा हो गए। नगर पालिका चेयरमैन दीपमाला गोयल भी पहुंच गईं। उनकी सूचना पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार जादौन भी पहुंच गए। उन्होंने गाय का उपचार किया।
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बरेली में नष्ट होता है बायो मेडिकल कचरा
स्वास्थ्य विभाग के नियम के मुताबिक हॉस्पिटल या लैब का तभी रजिस्ट्रेशन होता है जब उसको एनओसी मिली हो और इन विराट मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में उसका रजिस्ट्रेशन हो। यह कंपनी बरेली के परसाखेड़ा में स्थित है। वहीं बायो मेडिकल कचरे को नष्ट किया जाता है।
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कई हॉस्पिटल और पैथोलोजी लैब सड़क पर फेंक रहे कचरा
जिले में करीब साढ़े तीन सौ सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा पौथोलोजी लैब हैं। जबकि कचरा नष्ट करने वाली कंपनी में 42 हॉस्पिटल और पैथोलोजी लैब रजिस्टर्ड हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कई हॉस्पिटल और पैथोलोजी लैब सड़क पर कचरा फेंक रहे हैं।
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प्रति बेड तय होता है कचरा
जिले के कुछ अस्पताल स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। उनके अस्पतालों में प्रति बेड के अनुसार कचरा तय होता है। इसका वजन मात्र दो सौ ग्राम मापा गया है। कुछ अस्पतालों में चोरी छिपे बेड की संख्या बढ़ा ली गई है। वह अभिलेखों में दर्ज बेड के मुताबिक कचरा देते हैं। बाकी बढ़ाए गए बेड का कचरा सड़क पर फेंक देते हैं।
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बायो मेडिकल कचरे को सड़क पर नहीं फेंक सकते। अगर किसी अस्पताल द्वारा सड़क पर कचरा फेंका गया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले उसे नोटिस दिया जाएगा। बाद में उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा सकता है।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
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हमारे यहां कुल 42 हॉस्पिटल और पैथोलोजी लैब का रजिस्ट्रेशन है। जबकि जिले में इनकी संख्या करीब साढ़े तीन सौ होगी। तो सड़क पर कचरा नहीं फेंका जाएगा तो कहां फेंका जाएगा। वह अच्छी तरह से जानते हैं कि यह गलत है। इसके बावजूद वह सड़क पर कचरा फेंक रहे हैं।
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-ऋषि कपूर, मैनेजिंग डायरेक्टर इन विराट मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड
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सड़क पर मेडिकल वेस्ट फेंकने वाला कोई झोलाछाप ही रहा होगा। डॉक्टरों का एक संस्था से इस संबंध में अनुबंध है। यही संस्था मेडिकल वेस्ट उठा कर ले जाती है। अगर कहीं ऐसा हुआ है तो यह गलत है।
-शरद कुमार गुप्ता
सचिव, आईएमए
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