बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने जातीय रैलियों व सम्मेलनों पर रोक के हाईकोर्ट के आदेश पर परोक्ष असहमति जताते हुए ऐलान किया कि वे अब पूरे देश में सर्वसमाज भाईचारा रैलियां और सम्मेलन करेंगी।
अलबत्ता उन्होंने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि वह विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और आरएसएस जैसे संगठनों पर रोक लगाए जो धर्म के आधार पर राजनीति करते हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने नरेंद्र मोदी का गुणगान करने वाले पार्टी सांसद विजय बहादुर सिंह को अनुशासन में न रहने पर पार्टी से निकालने की भी चेतावनी दी और कहा कि ऐसे ही कामों के चलते उनका टिकट काटा गया है।
जात के नाम पर वोट को चोट, जातीय सम्मेलन पर रोक
उन्होंने सपा सरकार पर अपने तमाम आरोपों के साथ राज्यपाल से प्रदेश सरकार की बर्खास्तगी के लिए केंद्र से सिफारिश करने की मांग भी दोहराई।
यहां पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में बसपा सुप्रीमो मायावती ने जेल से चुनाव लड़ने पर रोक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी असहमति जताई।
फैसले के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए उन्होंने कहा, सत्ताधारी दल विरोधियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मायावती ने केंद्र सरकार से फैसले के खिलाफ अपील करने की मांग की है।
जातीय रैलियों पर रोक से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह रैलियों के तौर-तरीकों में बदलाव को तैयार हैं, लेकिन समतामूलक समाज की स्थापना के लिए ऐसे आयोजन होते रहेंगे।
उन्होंने तर्क दिया, देश का सामाजिक ढांचा ही जातीय आधार पर केंद्रित है। बसपा जातीय आधार पर बनी व्यवस्था को समतामूलक समाज में बदलना चाहती है।
मायावती ने कहा कि बसपा ने जो रैलियां कीं, सम्मेलन किए, वह सर्वसमाज को जोड़ने के लिए थे।