स्योहारा। स्योहारा क्षेत्र के ग्राम पंचायत सदाफल में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान विवरणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। सरकारी रिकॉर्ड से साफ हो गया है कि गांव में कराए गए लगभग सभी विकास कार्यों का भुगतान नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। अलग-अलग मदों में दिखाए गए कार्यों के नाम भले ही अलग हों, लेकिन भुगतान लगभग हर जगह एक ही ठेकेदार के खाते में गया है।
पोर्टल में उपलब्ध जानकारी के अनुसार 21 मई 2025 को ग्राम पंचायत सदाफल में हैंडपंप मरम्मत कार्य के नाम पर 5600 रुपये का भुगतान बहजाद अली कांट्रेक्टर को किया गया है, जबकि इस भुगतान के साथ जो वाउचर अपलोड किया गया है, वह हैंडपंप मरम्मत का न होकर केयर टेकर के मानदेय से संबंधित है। इस वाउचर में राशि 6000 रुपये दर्शाई गई है और भुगतान जय दुर्गा स्वयं सहायता समूह के नाम अंकित है। यानी जिस काम के लिए भुगतान दिखाया गया, उसका प्रमाणपत्र किसी और मद का है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर नजर डालें तो यह भी सामने आता है कि गांव में चाहे हैंडपंप मरम्मत हो या पानी की टंकी फिटिंग, बेंच खरीदनी हो या ई-लोडर की मरम्मत, साइन बोर्ड बनवाना हो या सीसी रोड का निर्माण, यहां तक कि दवा छिड़काव जैसे छोटे कार्य भी हों लगभग हर भुगतान एक ही ठेकेदार विजयपाल के नाम दर्शाया गया है। इससे स्पष्ट है कि पंचायत में विकास कार्यों की ठेकेदारी पूरी तरह एक व्यक्ति तक सीमित होकर रह गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि सीसी रोड जैसे निर्माण कार्यों में नियमों के अनुसार मेजरमेंट बुक होना अनिवार्य है, जिसमें कार्य की लंबाई, चौड़ाई और गुणवत्ता का तकनीकी विवरण दर्ज रहता है, लेकिन पोर्टल पर एमबी की जगह सिर्फ ठेकेदार के लेटरहेड पर तैयार किया गया सामान्य बिल या बाउचर ही अपलोड किया गया है।
इसी तरह हैंडपंप मरम्मत या टंकी फिटिंग जैसे तकनीकी कार्यों में भी किसी प्रकार की इंजीनियर रिपोर्ट या सत्यापन दस्तावेज नहीं हैं, सिर्फ साधारण बाउचर लगाकर भुगतान कर दिया गया है।
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