फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंताजनक : नहटौर लगातार घट रहा लिंगानुपात, 1000 बेटों और 633 बेटियां

विज्ञापन
विज्ञापन
चिंताजनक : नहटौर लगातार घट रहा लिंगानुपात, 1000 बेटों और 633 बेटियां
विज्ञापन

अजीत चौधरी
बिजनौर। बेटियों की सुरक्षा के लिए चलाई जा रही तमाम मुहिम नहटौर क्षेत्र में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। नहटौर में बेटियों का लिंगानुपात गंभीर स्तर तक गिरा हुआ है। यहां प्रति हजार बेटों के मुकाबले केवल 633 बेटियां ही जन्म ले रही हैं। केवल बेटों की ख्वाहिश और भ्रूण की जांच इसका कारण माना जा रहा है। ऐसे में भ्रूण जांच रोकने और जागरुकता के दावों की भी पोल खुलती नजर आ रही है।
बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ का नारा आज लगभग हर जगह सुनाई दे जाता है। यह नारा बेटियों को बचाने का संदेश देता है। बेटियों को बचाने के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन ये अभियान नहटौर क्षेत्र में ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों के अनुसार बेटियों के लिंगानुपात की रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस रिपोर्ट के अनुसार नहटौर में बेटियों की जन्म दर बहुत कम है। प्रति हजार बेटों के मुकाबले केवल 633 बेटियां ही जन्म ले रही हैं। कपड़ा उद्योग से जुड़े नहटौर में बेटियों की आबादी कम होना चिंता का विषय है। खास बात यह है कि नहटौर कस्बा है और यहां पर नगर पालिका क्षेत्र भी है जबकि सबसे अधिक लिंगानुपात वाला कोतवाली देहात पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र है। कस्बा होने के बाद भी यहां लिंगानुपात गड़बड़ाना बेटी बचाने के लिए शासन, प्रशासन द्वारा चलाई जा रही मुहिम पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।
विज्ञापन

बेटे की चाह में बेटियों से परहेज
बेटों के लिए मोह आज भी बेटियों की कम संख्या का सबसे बड़ा कारण है। किसान परिवारों में तो पहली संतान बेटा होने पर दूसरे बच्चे की कोशिश दंपती नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा कई भ्रूण की जांच होना कोई ज्यादा बड़ा मामला भी नहीं है। गांवों से जुड़ा कोतवालीदेहात क्षेत्र सबसे अधिक लिंगानुपात वाला क्षेत्र है। यहां लिंगानुपात 975 से भी ज्यादा है। यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है और यहां पर कोई ऐसा खास रोजगार भी नहीं हैं, जिससे लोग जुड़े हों, लेकिन इसके बाद भी यहां लिंगानुपात अधिक है।
बाहर लिंग जांच कराना आसान
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़ीं डॉ. राखी अग्रवाल ने बताया कि नहटौर जैसी छोटी जगह में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग जांच होकर कन्या भ्रूण हत्या कराना संभव नहीं लगता है। दूसरे राज्यों में लिंग की जांच कराना ज्यादा आसान है। कई बार बेटा होने पर दंपती दूसरा बच्चा भी नहीं करते हैं।
विज्ञापन

भ्रूण की जांच करने पर होगी कड़ी कार्रवाई
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. एसके निगम के अनुसार सभी जगह जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच भी की जाती है। नहटौर की हालत में पहले से सुधार हो रहा है। भ्रूण की जांच करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें