बिजनौर। योग, साधना और ध्यान से करीब करीब सभी प्रकार की बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। प्रतिदिन ऐसा करने वाला व्यक्ति की प्राण शक्ति स्वतंत्र रूप से कार्य करती है तथा उसके भीतर नकारात्मक विचार प्रवेश नहीं करते। इससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होकर दीर्घायु होता है। यह कहना है प्रतिदिन स्वयं के साथ साथ साधकों को योग, ध्यान और साधना में लगे योगाचार्यों का। योग करने से मस्तिष्क घात और हृदय घात समेत तमाम गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है।
बदलते लाइफ स्टाइल और अपेक्षाओं के बोझ से करीब करीब हर आयु वर्ग का व्यक्ति किसी न किसी कारण मानसिक रोग से पीड़ित है। इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए व्यक्ति का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अनिवार्य है। ऐसे में जरूरत है सभी को तनाव से दूर रहकर भरपूर जीवन जीने की। ऐसी सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए योग, साधना और ध्यान करने की आवश्यकता है। ऐसा कर सभी लोगों को मानसिक अवसाद की समस्या से बचाया जा सकता है। योगाचार्यों के अनुसार वर्तमान में काफी संख्या में लोग योग की ओर बढ़ रहे हैं।
इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन के उपाध्यक्ष मोहल्ला आदर्श नगर निवासी योगाचार्य ओमप्रकाश राणा बताते हैं कि वे योग के माध्यम से साधकों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए साधना और ध्यान कराते हैं। इससे मानसिक तनाव तो दूर होता ही है, साथ ही व्यक्ति के भीतर नकारात्मक विचार भी उत्पन्न नहीं होते।
प्रसिद्ध योगाचार्य चंद्रपाल सिंह उर्फ चंद्रदेव का कहना है कि वे 18 वर्षों से योग और साधना में लगे हैं। नि:शुल्क शिविर लगाकर साधकों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सभी लोगों को योग के प्रति समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है। उनका कहना है कि मानसिक अवसाद के साथ साथ करीब करीब सभी बीमारियों को समूल नष्ट करने की ताकत योग, साधना और ध्यान में है। उन्होंने बताया कि रोजाना योग करने वाले व्यक्ति को दवा की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन यदि हर व्यक्ति 20 मिनट भी अगर मन से चार से पांच योगासन भी कर ले तो वह निरोग रहता है। चंद्रदेव कहते हैं कि योग करने से शरीर की जीवन और प्राण शक्ति अच्छे ढंग से कार्य करती है। इससे साधक के भीतर नकारात्मक विचार नहीं आते। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे 60 वर्ष की आयु में भी दो उंगलियों पर ही पूरे शरीर का भार रोक लेते हैं।