बिजनौर में हेपेटाइटिस के मरीजों को आसानी से जिले में इलाज मिल रहा है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को जांच के लिए 80 किलोमीटर दूर मेरठ मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। हेपेटाइटिस के कीटाणुओं की संख्या बताने वाली जांच, जिसे वायरल लोड कहते हैं, वह जिला अस्पताल में नहीं होती है।
चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस आमतौर पर लीवर पर प्रभाव डालता है। जिले में हेपेटाइटिस बी और सी के ज्यादा मरीज देखने को मिल रहे हैं। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी के करीब 80 मरीज रजिस्टर्ड हैं। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी की दवाइयां उपलब्ध हैं। मरीजों को अब दवाई के लिए मेरठ या बाहर कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। जांच के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज ही जाना पड़ रहा है। क्योंकि जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की सामान्य जांच होती है। जिससे पता चलता है कि मरीज को हेपेटाइटिस बीमारी है या नहीं, लेकिन यह पता नहीं चल पाता है कि मरीज में हेपेटाइटिस के कीटाणु कितने प्रतिशत हैं। यह जानकारी वायरल लोड जांच के बाद मिलती है, जो आसपास में मेरठ मेडिकल कॉलेज में हो रही है।
नहटौर और धामपुर में भी हेपेटाइटिस के सेंटर
जिला अस्पताल के अलावा जिले में हेपेटाइटिस के दो सेंटर नहटौर और धामपुर बनाए गए हैं। क्योंकि उधर क्षेत्र से आने वाले मरीजों का बिजनौर जिला अस्पताल में आने में काफी समय और पैसा लगता है। जिसके चलते अब जल्द ही नहटौर और धामपुर में भी हेपेटाइटिस की दवाइयां उपलब्ध होंगी।
यह भी पढ़ें: बुझ गए चार घरों के चिराग: परिवारों पर टूटा गमों का पहाड़, गांव में पसरा मातम, नहीं जले चूल्हे, देखें तस्वीरें