आखिरी सांस तक नहीं मानेंगे कोरोना से हार
बिजनौर। कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए हर कोई प्रयास कर रहा है। हमारे कोरोना योद्धा कड़ी मेहनत और लगन के साथ कोरना को हराने में लगे हैं। यह कर्मवीर अपनी जान जोखिम में डालकर और अपने परिवार से दूर रहकर कोरोना संदिग्ध और संक्रमितों का उपचार तथा उनकी देखभाल में लगे हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली इन योद्धाओं को प्रणाम।
जिले में अब तक कोरोना संक्रमित 31 मरीज मिल चुके हैं, जिनमें से 20 मरीज कोरोना को हराकर पूर्ण रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं जबकि जिले के 11 मरीज कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं। इसके अलावा जिले के विभिन्न सरकारी एवं प्राइवेट संस्थानों में सैकड़ों संदिग्ध मरीज क्वारंटीन हैं। इनके उपचार में चिकित्सकों समेत विभिन्न स्वास्थ्य कर्मी पूरी निष्ठा के साथ लगे हैं।
छुट्टी तो बाद में ले लेंगे
जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. याघवेंद्र सिंह का कहना है कि उनका सबसे पहला काम मरीजों का उपचार करना है। दो महीने से घर नहीं गए हैं। वर्तमान में वे जिला अस्पताल के सामने स्थित मेडिकल कॉलोनी में रहते हैं और 24 घंटे किसी भी समय आवश्यकता पड़ने पर तुरंत ही जिला अस्पताल में हाजिर हो जाते हैं। उनका का मानना है कि कर्म ही पूजा है और वैसे भी इस समय तो एकजुट होकर ही कोरोना पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
बाहर कोरोना से हम लड़ेंगे आप घर पर रहिए
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बीआर त्यागी का कहना है कि कोरोना वायरस से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। सभी को लॉकडाउन और सरकार तथा चिकित्सकों द्वारा बताई जा रही गाइडलाइन का हर हाल में पालन करना चाहिए। यदि हम सभी ऐसा करेंगे तो इस वैश्विक महामारी बच सकते हैं। वे और उनके साथ में अन्य स्टाफ इस महामारी से पार पाने को अपने घर से बाहर हैं, इसलिए अन्य सभी लोग अपने घरों पर ही रहें तो इसमें उनकी भी भलाई है और सभी का फायदा है।
पहली बार देखा लॉकडाउन
फिजीशियन डॉ. अंकित चौधरी ने बताया कि उन्होंने आज तक इतना बड़ा लॉक डाउन नहीं देखा। वे कोरोना के लिए आरक्षित किए गए आइसोलेशन वार्ड में बनी ओपीडी करते हैं। वर्तमान में सामान्य ओपीडी बंद है, इसलिए फोन से मरीजों की समस्याओं का समाधान कर देते हैं। उनका कहना है कि आज सिर्फ एक ही मकसद है इस कोरोना को हराना।
डॉक्टर बीआर त्यागी।- फोटो : BIJNOR
डॉक्टर अंकित चौधरी।- फोटो : BIJNOR