अतिक्रमण की जंजीरों से होगी आजाद, इकड़ा बनेगी धामपुर की जीवनधारा
धामपुर। नदियों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों से मुक्त कराकर उन्हें अपने पूर्व स्वरूप में लाया जाएगा। फिर से नदियाें की धारा अविरल बहेगी। नाला बन चुकी इकड़ा नदी के साथ ही कडूला और गागन को फिर से नदी का स्वरूप दिया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को अभिलेखों का अध्ययन कर पुराने स्वरूप का खाका तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
एसडीएम विजय वर्धन तोमर का कहना है कि जिन लोगों ने नदियों, नालों, तालाबों, झीलों आदि की जमीनों पर अवैध निर्माण कर कब्जे कर रखे हैं, उन निर्माणों पर जल्द ही बुलडोजर चलेगा। इसकी वृहद कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। धामपुर के बीच से गुजर रही इकड़ा नदी की जमीन पर भी लोगों के अवैैध कब्जे है।
एसडीएम विजय वर्धन तोमर ने शुक्रवार को वार्ता में कहा कि प्रशासन किसी भी दशा में तालाब, झीलों, नदियों, झरनों पर अवैध कब्जा नहीं रहने देगा। लोगों द्वारा किए गए अवैध कब्जों के कारण धामपुर नगर के भीतर से बह रही इकड़ा नदी का स्वरूप नाले में बदल गया है। यह नदी धामपुर शुगर मिल से आगे गांव अजीतपुर दासी के जंगल में कडूला नदी में जाकर मिल जाती है। धामपुर की जीवनधारा कही जाने वाली इकड़ा नदी की तरह ही कडूला नदी, गागन नदी की जमीन पर भी अवैध कब्जा बताए जा रहे हैं।
लेखपालों को अभिलेखों का अध्ययन करने के निर्देश
एसडीएम ने बताया कि लेखपालों से अभिलेखों के अनुरूप नदियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया कि नदी, नालों पर जमीनों पर अवैध कब्जा करना अपराध की श्रेेणी में शामिल है। जांच कर ऐसे सभी अवैध कब्जों को बुलडोजर चला कर ध्वस्त किया जाएगा।
अभियान शुरू होता है, नहीं हटते कब्जे
नागरिक कांवेंद्र कुमार, मुखराम सिंह, दलजीत सिंह, विजय कुमार, विवेक कुमार का कहना है कि प्रशासन की ओर से पिछले कई दशकों से सरकारी जमीनों से अवैैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाया जाता है। पर दो चार दिन शोर मचने के बाद अभियान ठंडे बस्ते में चला जाता है। लोगों ने नगर के भीतर से बह रही इकड़ा नदी की जमीन पर अवैध कब्जे हैं। पर आज तक नहीं हटे।