नजीबाबाद। नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी में हजरत इमाम हुसैन की याद में चार रोजा सालाना मजलिसों के लिए जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में तंबुओं का शहर बस चुका है। 21 मई से या अली मौला अली की सदाएं चार दिन तक गूंजेंगी।
जोगीरम्पुरी दरगाह मुस्लिम शियाओं के अकीदे की वह पाकीजा जगह है जहां सालाना मजलिसों के दौरान शिया जायरीन आकर दरगाह की सरजमीं पर मौला अली की याद में सजदा करते हैं, रात दिन इबादत के साथ मन्नते मांगते हैं। मान्यता है कि हजरत अली घुड़सवारी दस्ते के साथ यहां पहुंचे थे। जोगीरम्पुरी के अकीदे की जगह बनने के बारे में कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के दरबार में अलाउद्दीन बुखारी वफादार दीवान थे। उनके इंतकाल के बाद उनके साहबजादे सैयद राजू जोगीरम्पुरी पहुंचे। उन्हें आलमगीर से खतरा था। वह या अली अदरिकनी वजीफा करते और मौला अली से अपनी हिफाजत की दुआ मांगते और दिन में जंगल में छिपे रहते थे। एक दिन देर से आंख खुलने पर वे घर पर बनी मचान पर ही सो गए। संयोग से उसी दिन एक घुड़सवारी दस्ता जंगल आया। दस्ते का नेतृत्व कर रहे नौजवान के चेहरे पर तेज था, हाथ में अलम था, बाकी घुड़सवार नकाबपोश थे।
घुड़सवारी दस्ते के मुखिया ने घास काटकर लौट रहे नाबीना यानि आंखों से अंधे ब्राह्मण से सैयद राजू को बुलाकर लाने का हुक्म दिया और कहा कि जाकर कहना, जिन्हें तुम रात-दिन याद करते हो, वो तुमसे मिलना चाहते हैं। उन्होंने नाबीना से पलभर को आंख बंद करने को कहा। आंख खोलते ही नाबीना की आंखों में रोशनी लौट आई। खुशी-खुशी वह सैयद राजू के पास पहुंचा और पूरा माजरा बताया। सैयद राजू जैसे ही घुड़सवारी दस्ते से मिलने पहुंचे तो वहां पर घोड़ों के मुंह के झाग और पैरों के निशान थे। मायूस सैयद राजू ने निशानों को महफूज कर लिया।
कुछ दिनों बाद सैयद राजू को ख्वाब में दरगाह तामीर करने का हुक्म हुआ। दरगाह तामीर कराने में पानी की किल्लत पर करिश्माई पानी का चश्मा फूट पड़ा। बताते हैं कि इस चश्मे का पानी आज भी बरकरार है। यकीन किया जाता है कि चश्मे का पानी पीने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं, पेट की बीमारियों और ऊपरी हवाओं से भी निजात मिलती है।
जोगीरम्पुरी में मातमी मजलिसें में हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को नम आंखों से याद किया जाता है। वाकयात-ए- करबला सुनकर जायरीन सीनाजनी के साथ मातम का इजहार करते हैं, अंगारों और छुरियों के मातम के साथ हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हैं।
दरगाह कमेटी के क्वार्टर और तंबुआ में ठहरेंगे जायरीन
नजीबाबाद। दरगाह कमेटी के प्रशासक शबाब नकवी की देखरेख में चार रोजा सालाना मजलिसें मुनक्किद होंगी। बड़ी संख्या में अंजुमने शिरकत के लिए पहुंच रहीं हैं। दरगाह के शमशुल हसन हाल से मातमी मजलिसों का सिलसिला 21 मई की सवेरे फजिर की नमाज के साथ शुरू हो जाएगा। दरगाह के क्वार्टरों के साथ बड़ी संख्या में जियारत के लिए आने वाले जायरीनों के ठहरने के लिए क्वार्टर और तंबू तैयार किए गए हैं। संवाद