जलीलपुर। सिंचाई विभाग के अफसरों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किए बिना लौटने के बाद गांव रायपुर खादर के निवासियों ने बड़ा हौसला दिखाया है। करीब 53 दिन से गांव की तरफ आ रही गंगा की जलधारा को रोकने के लिए गांववासियों ने श्रमदान शुरू कर दिया है। शनिवार को लगभग 80 गांववासियों ने 400 बालू भरे कट्टों से मिनी बंधा बनाना शुरू किया। यह जलधारा गांव में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर रही थी।
शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अफसरों का एक बड़ा दल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने आया था। स्टेट हाईवे पर बने गंगा पुल तक रास्ते में पानी नहीं था, जिससे निरीक्षण में कोई बाधा नहीं आई। हालांकि, गांव रायपुर खादर के पास गंगा की ओर जाने वाले रास्ते पर जलभराव था। इस जलभराव के कारण अफसरों का काफिला आगे नहीं बढ़ सका और वे वापस लौट गए। गांववासियों को लगा कि उनके क्षेत्र का निरीक्षण अधूरा रह गया है। प्रधान कृष्ण देव ने बताया कि यदि रास्ते में पानी न होता तो अधिकारी गंगा तक जाकर निरीक्षण कर सकते थे। अफसरों के गांव से निकलते ही गांववासियों ने जलधारा को श्रमदान से रोकने का निर्णय लिया। शनिवार को गांव रायपुर खादर के निवासी फावड़े, तशले और खाली कट्टे लेकर गंगा की तरफ चल दिए। उन्होंने पानी को पैदल पार कर गंगा तक पहुंच कर काम शुरू किया। यह कार्य सुबह दिन निकलते ही शुरू हो गया था। गांव नारनौर से भी कुछ लोग श्रमदान में शामिल हुए। गांववासियों ने मिलकर इस चुनौती का सामना करने का बीड़ा उठाया है।
-जलभराव की समस्या और गांववासियों का संकल्प
गंगा का जलस्तर कम होने और बारिश न होने के बावजूद गांव रायपुर खादर के निकट जलभराव बना हुआ है। गांववासियों मनोज कुमार, बरन सिंह, मदनपाल सिंह, नरोत्तम सिंह, गंगाशरण, अमरनाथ, विनोद कुमार, गुलाब सिंह, रोहिताश सिंह और अमित कुमार ने बताया कि 53 दिन से गंगा से निकली एक जलधारा ने गांव रायपुर खादर की तरफ रुख किया हुआ है। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही यह जलधारा सबसे पहले बाढ़ के हालात पैदा करती है। इसी जलधारा के रास्ते पर बालू के कट्टे भरकर मिनी बंधा बनाने का काम शुरू किया गया है। गांववासियों ने संकल्प लिया है कि वे इस समस्या का समाधान खुद करेंगे। रविवार को भी अन्य गांववासियों को साथ लेकर श्रमदान जारी रहेगा। यह पहल उनकी आत्मनिर्भरता और सामूहिक शक्ति का प्रतीक है।
-धार्मिक अनुष्ठान और अफसरों को मौका दिखाने की कोशिश
गांव रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी के निवासियों की इच्छा थी कि सिंचाई विभाग के अफसर उनके गांव की तरफ से गंगा तक जाकर पानी आने के रास्ते को देखें। हालांकि, रास्ते पर पानी के कारण अफसरों का काफिला आगे नहीं बढ़ सका। गांव प्रधान कृष्णदेव सिंह और गांववासी बरन सिंह व मनोज कुमार ने बताया कि गांववासी दो दिन से गंगा पर जाकर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे थे। गांववासियों का मानना है कि धार्मिक अनुष्ठान से भी कुछ राहत मिलती है। बृहस्पतिवार को गंगा पर कुछ सामान अर्पित किया गया था। शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अफसरों के आने से पहले गंगा पर हवन भी किया गया। गांववासियों के अनुसार, इन प्रयासों से गंगा को जाने वाले रास्ते पर थोड़ा पानी कम भी हुआ था।
-भविष्य की तैयारी और एकजुटता
गांववासियों के अनुसार, यह सारी मशक्कत अफसरों को गंगा तक ले जाने के लिए की जा रही थी। उनका उद्देश्य भविष्य में सिंचाई विभाग या अन्य अफसरों को गंगा तक ले जाकर मौके की स्थिति दिखाना है। इसी कारण वे श्रमदान कर पानी को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहल गांववासियों की एकजुटता और अपनी समस्याओं के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाती है। वे सरकारी मदद का इंतजार किए बिना खुद ही समाधान ढूंढ रहे हैं। इस मिनी बंधे के निर्माण से गांव को बाढ़ के खतरे से बचाने की उम्मीद है। यह सामूहिक प्रयास क्षेत्र में एक मिसाल कायम कर रहा है।
वर्जन-
एसडीएम प्रशांत वर्मा ने बताया कि गांववासी परेशान न हों। संबंधित विभाग की टीम ने निरीक्षण किया है। बाढ़ रोकथाम के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम होगा।